प्रमुख महानगरों में त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले खुदरा चीनी के दाम में करीब 40% तक की तेजी दर्ज की गई है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की मिलों में एक्स-मिल कीमतें जो पहले 4,800 रुपये के आसपास थीं, वे अगस्त के दूसरे हफ्ते में बढ़कर 5,350 रुपये प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंच गईं और कुछ जगहों पर यह आंकड़ा 5,850 रुपये तक चला गया। कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट और आयात नियमों में बड़े बदलाव किए हैं।
कैसे बदली स्थिति: अनुमान और हकीकत का अंतर
2025-26 के मौजूदा चीनी सीजन की शुरुआत में उद्योग संगठन 'इंडियन शुगर एंड बायो-एन्जॉय मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन' (ISMA) ने जुलाई 2025 के अपने शुरुआती अनुमान में उत्पादन 34.90 मिलियन टन रहने की उम्मीद जताई थी। इस अनुमान के आधार पर सरकार ने सीजन के शुरुआती महीनों में ही 1.5 मिलियन टन चीनी के निर्यात की अनुमति दे दी, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अलग था।
हालांकि, जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ा, उत्पादन अनुमान लगातार कम होते चले गए। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कीट प्रकोप (रेड रोट और टॉप बोरर) और अत्यधिक बारिश के कारण फसल को नुकसान हुआ। ISMA ने फरवरी में अनुमान घटाकर 32.4 मिलियन टन और अप्रैल में 32 मिलियन टन कर दिया। वहीं, सरकार का मौजूदा अनुमान उत्पादन को 30.6 मिलियन टन पर आंकता है, जिसमें से लगभग 2.9 मिलियन टन एथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किया जा चुका है।
सरकार के कड़े कदम और आयात की वापसी
घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने मई में चीनी निर्यात पर 30 सितंबर तक प्रतिबंध लगा दिया। इसके बावजूद कीमतें नहीं रुकीं, और 19 अगस्त को कर्नाटक की मिलों में कीमतें 7,100 रुपये प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंच गईं।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप किया। अगस्त के दूसरे हफ्ते में स्टॉकहोल्डिंग लिमिट को कड़ा करते हुए बड़े औद्योगिक खरीदारों के लिए स्टॉक की सीमा को 15 दिन कर दिया गया। इसके अलावा, लगभग एक दशक में पहली बार चीनी पर 100% आयात शुल्क को समाप्त करते हुए 1 मिलियन टन चीनी के आयात की अनुमति दी गई।
एथेनॉल डायवर्जन और उत्पादन का गणित
इस संकट के बीच एथेनॉल नीति को लेकर भी बहस तेज हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में इस हालिया उछाल के लिए एथेनॉल डायवर्जन जिम्मेदार नहीं है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के मुताबिक, गन्ने से एथेनॉल का हिस्सा 2022-23 के 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% पर आ गया है, जबकि अब तीन-चौथाई एथेनॉल मक्का जैसे अनाजों से तैयार किया जा रहा है।
भविष्य की चिंताएं और स्टॉक की स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार देश का कैरी-ओवर स्टॉक गिरकर लगभग 3.2 मिलियन टन पर आ सकता है, जो पिछले दो दशकों में सबसे निचला स्तर है। आने वाले 2026-27 सीजन के लिए भी शुरुआती अनुमान कमजोर बने हुए हैं, जिसमें अल नीनो के प्रभाव और मानसूनी अनिश्चितताओं के चलते उत्पादन में और कमी आने की आशंका जताई जा रही है। सरकार का कहना है कि वह घरेलू स्तर पर उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ-साथ गन्ना किसानों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके।
