मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन में गुटबाजी को खत्म करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व के अल्टीमेटम के बीच धार जिले के कुक्षी में पार्टी का आंतरिक क्लेश खुलकर सामने आ गया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के दौरे के दौरान न सिर्फ कार्यकर्ता भाषण से पहले ही पंडाल छोड़कर खाना खाने लगे, बल्कि पत्रकारों के तीखे सवालों पर नेताओं की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिन पहले ही नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी बिप्लव कुमार देव ने राज्य के नेताओं को गुटबाजी और आपसी खींचतान एक तय समय सीमा में बंद करने की सख्त चेतावनी दी थी। इसी सिलसिले में खंडेलवाल और विजयवर्गीय आदिवासी बहुल जिलों—धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी और खरगोन के संगठनात्मक प्रवास पर निकले हैं।
भाषण से पहले ही खाने की प्लेट पर टूटे कार्यकर्ता
कुक्षी के हीरा पैलेस में देर शाम करीब 7:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे थे। हालांकि, आयोजन का माहौल तब असहज हो गया जब प्रदेश अध्यक्ष के माइक संभालने से ठीक पहले ही कुर्सियां खाली होने लगीं।
देर रात का वक्त होने का हवाला देकर कई कार्यकर्ता हॉल छोड़कर भोजनशाला की तरफ बढ़ गए। इस बीच, हालात संभालने की कोशिश में धार ग्रामीण जिला अध्यक्ष चंचल पाटीदार कार्यकर्ताओं के हाथों से खाने की प्लेटें छीनकर उन्हें वापस कार्यक्रम में खींच लाने की जद्दोजहद करते नजर आए, जिसका वीडियो और चर्चा स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।
गुटबाजी के सवाल पर टालमटोल और तल्खी
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने जब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से पार्टी के भीतर जारी गुटबाजी और बिप्लव देव के अल्टीमेटम को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए गोलमोल बातें कहीं।
मामला तब और तूल पकड़ गया जब मीडिया के सवालों पर पीछे खड़े कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकारों के इस सवाल को ही 'बकवास' करार दे दिया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जहां अनुशासन और गुटबाजी खत्म करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं मैदानी दौरों पर इस तरह की घटनाएं संगठन के भीतर की जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं।
