डूंगरपुर नगर परिषद चुनावों में मतदान की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को दो बड़े झटके लगे हैं। कुल 40 वार्डों वाले इस निकाय चुनाव में बीजेपी ने बिना मतदान के ही दो सीटों पर अपनी जीत तय कर ली है। कांग्रेस के एक उम्मीदवार ने अपना पर्चा वापस ले लिया, जबकि दूसरे का नामांकन तकनीकी जांच के दौरान खारिज हो गया था।
वार्ड-28 से कांग्रेस प्रत्याशी का नाम वापसी
बुधवार को डूंगरपुर नगर परिषद के वार्ड नंबर-28 से चुनावी मैदान में उतरे कांग्रेस प्रत्याशी प्रतीक बलात ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया। इस वार्ड में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच तय माना जा रहा था।
प्रतीक बलात के मैदान से हटने के बाद अब बीजेपी उम्मीदवार चेतन खराड़ी अकेले वैध प्रत्याशी बच गए हैं। इस वजह से इस सीट पर उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है।
वार्ड-23 में कांग्रेस का पर्चा खारिज
इससे ठीक एक दिन पहले मंगलवार को वार्ड नंबर-23 में नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी गणेश कटारा का पर्चा खारिज कर दिया गया था। इसके बाद बीजेपी प्रत्याशी मनन कलासुआ—जो निवर्तमान सभापति अमृत कलासुआ के पुत्र हैं—अकेले वैध उम्मीदवार के रूप में मैदान में रह गए।
इन दोनों वार्डों में बीजेपी की निर्विरोध बढ़त के बाद डूंगरपुर निकाय चुनावों का समीकरण बदल गया है। कांग्रेस के हाथ से शुरुआती दौर में ही दो वार्ड निकल चुके हैं।
38 वार्डों पर टिकी निगाहें, बागियों से मुकाबला
40 सदस्यों वाली डूंगरपुर नगर परिषद में दो वार्ड गंवाने के बाद अब कांग्रेस का पूरा फोकस शेष 38 वार्डों पर है। पार्टी इन सीटों के लिए नए सिरे से चुनावी रणनीति तैयार करने में जुट गई है।
राज्यभर के 309 नगरीय निकायों और 10,245 वार्डों के लिए आगामी 9 और 11 सितंबर 2026 को दो चरणों में मतदान तय किया गया है, जिसके बाद 14 सितंबर को मतगणना होगी। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद टिकट वितरण से उपजा असंतोष, पार्टी बागी और निर्दलीय उम्मीदवार दोनों ही प्रमुख दलों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। अब सभी उम्मीदवारों का पूरा ध्यान सड़क, सीवरेज, पेयजल, सफाई और अतिक्रमण जैसे स्थानीय मुद्दों के सहारे मतदाताओं को साधने पर टिका है।
