पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल यानी E20 के इस्तेमाल से पुराने वाहनों के माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत तक की मामूली कमी आ सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह असर उन वाहनों पर पड़ता है जो विशेष रूप से E10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए थे।
इस बीच, सोशल मीडिया और वॉट्सऐप प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे उन दावों को खारिज किया गया है जिनमें माइलेज 15 से 30 प्रतिशत तक घटने की बात कही जा रही थी। तकनीकी जानकारों और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वास्तविक अंतर केवल 3 से 5 प्रतिशत तक ही सीमित है।
ड्राइविंग स्टाइल और मेंटेनेंस भी तय करते हैं माइलेज
मंत्री ने संसद को बताया कि किसी भी वाहन का माइलेज केवल ईंधन के रासायनिक कंपोजीशन पर निर्भर नहीं करता। इसके पीछे कई अन्य तकनीकी और व्यावहारिक कारक काम करते हैं।
वाहन की माइलेज क्षमता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों में ड्राइविंग स्टाइल, समय पर मेंटेनेंस, सही टायर प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल शामिल हैं। इन सभी पैमानों में गड़बड़ी होने पर भी ईंधन की खपत बढ़ जाती है, जिसे अक्सर लोग केवल फ्यूल क्वालिटी से जोड़कर देखते हैं।
इंजन खराब होने का कोई वेरिफाइड मामला नहीं
सरकार के मुताबिक, देश में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से बड़े स्तर पर इंजन खराब होने का अभी तक कोई आधिकारिक या वेरिफाइड मामला सामने नहीं आया है। इसके उलट, एथेनॉल मिश्रण से पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग में सुधार होता है।
उच्च ऑक्टेन रेटिंग मिलने से इंजन को बेहतर एंटी-नॉक परफॉर्मेंस और स्मूथ एक्सीलरेशन मिलता है। देश में वर्तमान नीति के तहत वाहनों के लिए E20 (20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल) का उपयोग अनिवार्य किया गया है। सरकार का तर्क है कि इस नीति से विदेशी कच्चे तेल पर देश की निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे अब तक लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
रायपुर कंज्यूमर कमीशन का फैसला
एक तरफ जहां केंद्र सरकार E20 के फायदों को गिना रही है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ता अदबों के स्तर पर इसको लेकर विवाद भी सामने आए हैं। रायपुर डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने 14 जुलाई को मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) के खिलाफ एक अहम फैसला सुनाया।
कमीशन ने E20 पेट्रोल के कारण कार में आई तकनीकी खराबी और ग्राहकों को बिना उचित सूचना दिए गैर-कम्पैटिबल (non-compatible) वाहन बेचने को सीधे तौर पर 'सेवा में कमी' (deficiency in service) माना। इस फैसले ने ऑटोमोबाइल सेक्टर और ग्राहकों के बीच इस ईंधन के तकनीकी पहलुओं पर नई बहस छेड़ दी है।
आगे की तैयारी: E30 मानक की दिशा में मंथन
प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर सरकार अब इससे एक कदम आगे की तैयारी में जुटी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के गलियारों में भविष्य के लिए E30 यानी 30 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले मानक लाने की दिशा में भी चर्चा और शुरुआती स्तर की तैयारी चल रही है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि E30 मानकों के लागू होने से पहले वाहन निर्माताओं और कंज्यूमर्स दोनों के लिए तकनीकी अनुकूलता और इंजन डिजाइन में बड़े बदलावों की जरूरत होगी, ताकि पुरानी गाड़ियों पर पड़ने वाले संभावित असर को कम किया जा सके।
