नीमच मेडिकल कॉलेज की टीम ने जन्माष्टमी पर जब पूरा शहर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशियां मना रहा था उसी दौरान नीमच जिला अस्पताल में एक मासूम कान्हा की जिंदगी और हाथ बचाने की जद्दोजहद से गुजर रहा था। बच्चे की कोहनी के पास गंभीर फ्रैक्चर के चलते उसकी हालत नाजुक थी। शासकीय अवकाश होने के बावजूद डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे की इमरजेंसी सर्जरी की और सफल उपचार कर उसे राहत दी।
चिकित्सकों के मुताबिक बच्चे को Supracondylar Humerus Fracture हुआ था। चोट के कारण कोहनी के आसपास काफी सूजन, त्वचा पर लालिमा और ब्लिस्टरिंग यानी छाले हो गए थे। इसके साथ ही हाथ की नाड़ी (पल्स) भी कमजोर पड़ गई थी। ऐसी स्थिति में समय पर उपचार नहीं मिलने पर हाथ को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक विभाग की पहली इमरजेंसी सर्जरी --
बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के अस्थिरोग विभाग ने तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। जन्माष्टमी के सार्वजनिक अवकाश के बावजूद डॉक्टर एनेस्थीसिया विशेषज्ञ नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी टीम अस्पताल पहुंची और पूरी तैयारी के साथ बच्चे की सर्जरी की गई।
यह ऑपरेशन जिला चिकित्सालय में मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक विभाग द्वारा की गई पहली आपातकालीन ऑर्थोपेडिक सर्जरी भी है। ऑपरेशन विभागाध्यक्ष एवं असिस्टेंट मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. पुनीत कुमार आचार्य के नेतृत्व में किया गया।
समय पर इलाज बेहद जरूरी --
डॉ. पुनीत कुमार आचार्य ने बताया कि गंभीर फ्रैक्चर के मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार बेहद जरूरी होता है। जिला अस्पताल में इमरजेंसी ऑर्थोपेडिक सर्जरी की शुरुआत गंभीर मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत कम होगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा।
जन्माष्टमी पर परिवार को मिली सबसे बड़ी खुशी --
एक तरफ जन्माष्टमी पर मंदिरों में भगवान कृष्ण के जन्म की खुशियां मनाई जा रही थीं वहीं अस्पताल में नन्हे कान्हा के सफल ऑपरेशन के बाद उसके परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। परिजनों ने छुट्टी के दिन भी तत्काल उपचार उपलब्ध कराने वाली पूरी मेडिकल टीम का आभार जताया। जन्माष्टमी के दिन बच्चे का सफल इलाज परिवार के लिए इस पर्व की सबसे बड़ी खुशी बन गया।
