बच्चों में गुणात्मक शिक्षा हमेशा से ही बहस का विषय रहा है। स्कूलों की स्थिति, पढ़ने पढ़ाने का तौर तरीका ही नहीं, स्कूलों की आंतरिक स्थिति के साथ उसके संसाधन भी इस बहस का मसला होता है। लिहाजा इनमें सुधार की गुंजाइश के साथ समीक्षा के आधार पर बदलाव भी होता रहता है ताकि बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए युवा अपनी क्षमता से आगे जाकर प्रयास करता है...प्रश्नपत्रों के लीक के मसले उनकी आशाओं को धूमिल कर देते हैं...आशा और निराशा के बीच का यह वक्त बहुत त्रासदीपूर्ण होता है...जिम्मेदारों पर इसका असर हो या न हो...इससे जुड़ा हर किरदार विसंगतियों के मापदंडों के साथ, वैचारिक और व्यवहारिक रुप से सामान्य दिखते हुए भी असामान्य से लगते हैं...व्यवस्थाओं की पेचीदगियों में उलझन जकड़ना नहीं, उस जकड़न से बाहर निकलने की जद्दोजहद सफलता की ओर उठाया गया एक कदम माना जाता है...सफलता प्राप्त करना हर किसी की चाहत होती है। उसे हासिल करना जीवन का लक्ष्य भी होता है। इसके लिए मेहनत करने पर जोर दिया जाता है। यानी परिश्रम से पुरुषार्थ की ओर जाना। लक्ष्य को हासिल करने के लिए काफी प्रयास करना होता है। मेहनत और परिश्रम से प्राप्त सफलता का आधार मजबूत होता है। इसीलिए युवाओं को हमेशा धीर बनो,वीर बनो का संदेश दिया जाता है। किस्से कहानियों के माध्यम से परिश्रम का महत्व समझाया गया है। पंचतंत्र की कहानियों में पशु पक्षियों को प्रतीक बनाकर परिश्रम के बारे में बताया गया है। परिश्रम से आत्मविश्वास मजबूत होता है और वह सफलता के द्वार खोलता है। एक लक्ष्य को लेकर उस पर निरंतर अभ्यास से मन के अंदर एक विश्वास पैदा होता है कि यह काम मैं अवश्य करुंगा,सफलता मुझे जरुर मिलेगी। इस तरह का आत्मविश्वास पैदा होना ही सफलता की ओर बढ़ता एक कदम होता है। इसीलिए आत्मविश्वास को सबसे बड़ा मित्र माना गया है। लाओ जू कहते हैं कि स्वास्थ्य सबसे बड़ी दौलत है। संतोष सबसे बड़ा खजाना है और आत्म विश्वास सबसे बड़ा मित्र है। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट मन में आत्मविश्वास पैदा होने के तरीकों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि विश्वास ईमानदारी,सम्मान,कार्य की पवित्रता, विश्वसनीय संरक्षण और निस्वार्थ कर्म के द्वारा पनपता है। इनके बिना यह नहीं रह सकता। नोर्मन विन्सेंट पील का मानना है कि कार्य करना,आत्मविश्वास को पुनःस्थापित और निर्माण करने का महान साधन है। निष्क्रियता,सिर्फ परिणाम नहीं बल्कि भय का कारण है। शायद आप जो कार्य करेंगे वो सफल होगा या शायद कोई और कार्य या समायोजन करना होगा,पर कोई भी काम करना निष्क्रियता से अच्छी है। इसके साथ वे यह भी कहते हैं कि खुद पर भरोसा रखो। अपनी क्षमताओं पर विश्वास करो। बिना अपनी शक्तियों में एक विनम्र लेकिन उचित आत्मविश्वास के तुम सफल या प्रसन्न नहीं हो सकते। जो पेट्रीनो गौरव, निष्ठा, अनुशासन,दिलो दिमाग के अलावा आत्म विश्वास को सभी तालों की चाभी मानते है। मार्कस गर्वे जीतने का गुर बताते हुए कहते हैं कि अगर आप में आत्मविश्वास है तो तुम शुरू करने से पहले ही जीत चुके हो। आत्मविश्वास होता है तो तभी सफलता की ओर पहला कदम उठता है...बच्चों से लेकर युवा होने तक आत्मविश्वास से उठाया गया हर कदम सफलता की गारंटी मानी जाती है, बशर्ते सामने आने वाली हर चुनौती और बाधा को धैर्य और संयम से पूरा किया जाए...भटकाव के भंवर में न फंसते हुए अपने लक्ष्य को साधने के लिए तत्पर रहें और नीति नियंता भी व्यवस्थाओं में व्याप्त विसंगतियों को दूर कर सामान्य परिस्थितियों के अनुकूल वातावरण पैदा करें तो जेन जी के सपने पूरे हो सकेंगे और वे भी अपने सपने बिना किसी व्यवधान के पूरा कर सकेंगे...
आत्मविश्वास: जीत की पहली सीढ़ी
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