मऊगंज में ‘सड़क घोटाले’ का बड़ा धमाका!
मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में पंचायतों के जरिए कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नईगढ़ी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जिल्हाडी और दुवगमा में ग्रामीणों ने पीसीसी सड़क निर्माण में भारी अनियमितताओं, गुणवत्ता में कमी और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। कहीं एस्टीमेट के विपरीत निर्माण का दावा किया जा रहा है तो कहीं आधी नई और आधी पुरानी सड़क को जोड़कर पूरा कार्य दिखाने का आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।मऊगंज जिले की नईगढ़ी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जिल्हाडी के सिंगई गांव में बन रही पीसीसी सड़क इन दिनों ग्रामीणों के विरोध का केंद्र बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत एस्टीमेट और तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं कराया जा रहा। निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं और आरोप है कि निर्धारित मापदंडों का पालन किए बिना कार्य को पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क से वर्षों तक लोगों को सुविधा मिलनी थी, वही सड़क निर्माण के दौरान ही विवादों में घिर गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर जांच करे तो निर्माण कार्य में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। वहीं ग्राम पंचायत दुवगमा से सामने आए आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में केवल कुछ हिस्से में नई सड़क बनाई गई, जबकि शेष हिस्से में पहले से बनी पुरानी सड़क को जोड़कर पूरे कार्य का दावा कर दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि पूरा निर्माण कार्य नहीं हुआ था तो फिर संपूर्ण भुगतान किस आधार पर जारी किया गया?ग्रामीण पूछ रहे हैं कि माप पुस्तिका में आखिर क्या दर्ज किया गया? कार्य का सत्यापन किस अधिकारी ने किया? भुगतान से पहले मौके का निरीक्षण हुआ या नहीं? यदि हुआ तो अधूरे कार्य को पूर्ण कैसे मान लिया गया? इन सवालों ने पंचायत और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे मामले की शिकायत नईगढ़ी जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतों के बावजूद जांच न होना ग्रामीणों के बीच नाराजगी और अविश्वास को बढ़ा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो जनता का भरोसा बना रहता, लेकिन अधिकारियों की चुप्पी कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है।मामला केवल सड़क की गुणवत्ता और भुगतान तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य से संबंधित कई आवश्यक प्रक्रियाओं और कानूनी औपचारिकताओं का भी पालन नहीं किया गया। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो मामला केवल घटिया निर्माण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी का भी बन सकता है। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जब विकास कार्यों पर ही सवाल उठने लगें तो योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।आज ग्रामीणों की मांग साफ है—सड़क निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेज, माप पुस्तिका, तकनीकी स्वीकृतियां और भुगतान रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसके भरोसे गांवों के विकास की नींव रखी जाती है। यदि आरोप सही साबित हुए तो यह मामला पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है। आखिर जनता के पैसे से बनने वाली सड़कों का हिसाब कौन देगा? यह सवाल अब मऊगंज की जनता प्रशासन से पूछ रही है।

