हरिद्वार में दशहरे की रात से लागू गंगा बंदी आखिरकार खत्म हो गई है। इसके साथ ही हरकी पैड़ी और शहर के अन्य प्रमुख गंगा घाटों पर एक बार फिर पानी पहुंच गया है, जिससे घाटों की रौनक लौट आई है। दीपावली की रात के बाद गंग नहर में पानी छोड़े जाने से स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों ने राहत की सांस ली है।
18 दिनों तक चली सफाई और मरम्मत
हर साल की तरह इस बार भी दशहरा से दीपावली तक करीब 18 दिनों के लिए गंग नहर बंद रखी गई थी। इस अवधि में नहर की सिल्ट निकालकर समतलीकरण, मरम्मत और साफ-सफाई के काम पूरे किए गए।
अधिकारियों के मुताबिक, इस साल की बंदी अन्य वर्षों के मुकाबले अलग रही क्योंकि अगले साल होने वाले महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए कई बड़े निर्माण कार्य भी इसी दौरान निपटाए गए। इस वार्षिक रखरखाव के दौरान कुंभ 2027 की तैयारियों के तहत करीब तीन किलोमीटर लंबे नए गंगा घाटों का निर्माण भी किया गया है।
अर्धकुंभ 2027: 14 जनवरी से शुरू होंगे 11 अमृत स्नान
उत्तराखंड में अगले साल आयोजित होने वाले हरिद्वार अर्धकुंभ मेले की तारीखों और आयोजनों का खाका भी सामने आ गया है। मेला प्रशासन ने बुधवार को हुई बैठक में बताया कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति से लेकर 20 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा तक कुल 11 'अमृत स्नान' होंगे।
मेले के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से आने वाली देवी-देवताओं की पालकियों की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। प्रशासन के तय कार्यक्रम के अनुसार, 14 मार्च को ऋषिकेश में 'देव डोलियों' की शोभायात्रा निकलेगी, जबकि इसके अगले दिन हरिद्वार में अमृत स्नान होगा।
सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का मौका
अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में देव डोली शोभायात्रा और स्नान व्यवस्थाओं की रूपरेखा पर चर्चा की गई। सरस्वती ने कहा कि कुंभ मेले के दौरान निकलने वाली ये शोभायात्राएं उत्तराखंड की लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं को दुनिया के सामने लाने का बड़ा अवसर हैं।
बैठक में शामिल देवभूमि लोक संस्कृति विरासत शोभायात्रा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि दूर-दराज से आने वाली देव डोलियों, उनके साथ चल रहे प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पुख्ता तैयारियां की जा रही हैं।
