भक्ति और अध्यात्म पर आधारित कम बजट की फिल्म 'हनुमान अंश' साल 2026 की सबसे बड़ी बॉक्स ऑफिस सक्सेस बनकर उभरी है. शुरुआती दो हफ्तों तक संघर्ष करने वाली इस फिल्म ने मजबूत वर्ड ऑफ माउथ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई रिलीज के दम पर दुनिया भर में 300 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. खास बात यह है कि रिलीज के छठे हफ्ते में भी यह फिल्म भारतीय बॉक्स ऑफिस पर कई नई फिल्मों को पछाड़कर शीर्ष पायदान पर बनी हुई है.
धीमी शुरुआत से धमाकेदार रफ्तार तक
विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने रिलीज के पहले दिन महज 10 लाख रुपये का बिजनेस किया था. शुरुआती दो हफ्तों में इसका कुल कलेक्शन केवल 1.50 करोड़ रुपये ही सिमट कर रह गया था. हालांकि, इसके बाद दर्शकों से मिले सकारात्मक फीडबैक के कारण टिकट खिड़की पर तस्वीर पूरी तरह बदल गई. अपने चौथे हफ्ते से ही 'हनुमान अंश' हर हफ्ते भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 60 करोड़ रुपये नेट से अधिक की कमाई कर रही है. सिनेमाघरों में अपने 41वें दिन यानी छठे बुधवार को इसने घरेलू बाजार में 6 करोड़ रुपये नेट जुटाए, जिससे इसका कुल घरेलू नेट कलेक्शन 237 करोड़ रुपये (280 करोड़ रुपये ग्रॉस) तक पहुंच गया है.
'मिर्जापुर द मूवी' को पछाड़ा
फिल्म के कारोबार की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह बॉक्स ऑफिस पर बड़ी रिलीज 'मिर्जापुर द मूवी' की तुलना में लगभग 50 गुना अधिक कमाई कर रही है. भारत में शानदार प्रदर्शन के बाद होमबाले फिल्म्स ने इसके ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स हासिल किए, जिसके बाद इसे विदेशी बाजारों में उतारा गया. केवल दो हफ्तों के विदेशी प्रदर्शन में फिल्म ने करीब 2 मिलियन डॉलर का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज किया है. दुनिया भर में 300 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार करने के साथ ही यह फिल्म 2026 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों की सूची में 9वें स्थान पर पहुंच गई है. इसने अक्षय कुमार की फिल्म 'भूत बांग्ला' (250 करोड़ रुपये) के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है.
नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित है कहानी
'हनुमान अंश' की पटकथा नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित है. फिल्म की कहानी लक्ष्मीनारायण नाम के एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मां के निधन के बाद जीवन, मृत्यु और ईश्वर से जुड़े गहरे सवालों के जवाब तलाशने के लिए घर से निकलता है. उत्तर भारत की यात्रा के दौरान उसकी आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है और आगे चलकर वह संत नीम करोली बाबा के रूप में प्रसिद्ध होता है.
