सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए व्रत रखा है। इस दिन उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पति-पत्नी को एक साथ मिलकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि इस विशेष अनुष्ठान से दांपत्य जीवन की अड़चनें दूर होती हैं।
घर के मंदिर में ऐसे लें व्रत का संकल्प
हरियाली तीज की पूजा की शुरुआत सुबह स्नान-ध्यान के बाद व्रत और पूजन के संकल्प से होती है। घर के मंदिर में भगवान के समक्ष पति-पत्नी को मिलकर यह संकल्प लेना चाहिए कि वे पुत्र, पौत्र और सौभाग्य की वृद्धि की कामना से शिव-पार्वती की आराधना कर रहे हैं। इसके बाद पूजा की शुरुआत सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना से होती है।
गणेश जी को स्नान कराने के बाद वस्त्र, गंध, फूल और अक्षत (चावल) अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद मुख्य पूजन यानी शिव-पार्वती की आराधना शुरू होती है।
शिव-पार्वती पूजन की चरणबद्ध विधि
शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा को सबसे पहले जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद पंचामृत और फिर दोबारा शुद्ध जल से स्नान कराने की परंपरा है। देवताओं को वस्त्र अर्पित करने के बाद फूलों के आभूषण और पुष्पमाला पहनाई जाती है।
- तिलक और मंत्र जाप: भगवान शिव को 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः' मंत्र का उच्चारण करते हुए अष्टगंध का तिलक लगाया जाता है। वहीं, माता पार्वती को 'ऊँ गौर्ये नमः' कहते हुए कुमकुम का तिलक अर्पित किया जाता है।
- प्रमुख सामग्रियां: पूजन के दौरान शिव-पार्वती को बिल्व पत्र और कनेर के फूल विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती की जाती है और परिक्रमा पूरी की जाती है।
- मंत्र जाप और प्रसाद: गौरी-शंकर के पूजन के दौरान निरंतर 'ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः' मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है। अंत में नैवेद्य अर्पित कर प्रसाद बांटा जाता है और पूजा में हुई अनजाने भूलचूक के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है।
