राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का रास्ता साफ होने की दिशा में आज बड़ा दिन है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर स्थित शासन सचिवालय के विकास खंड में पंचायती राज सभागार में आज दोपहर 3 बजे एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इस बैठक में चुनाव कार्यक्रम, मतदान के चरण, नामांकन प्रक्रिया और आचार संहिता की तारीखों पर मुहर लगने की पूरी संभावना है।
चार चरणों में प्रस्तावित हैं चुनाव
हाईकोर्ट के समक्ष रखे गए प्रस्ताव के मुताबिक, राज्य में पंचायत चुनाव चार चरणों में कराने की तैयारी है। इसके तहत जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 13, 23, 29 अक्टूबर और 3 नवंबर को मतदान प्रस्तावित किया गया था। वहीं, पंच और सरपंच पदों के लिए 14, 24, 30 अक्टूबर और 4 नवंबर को वोटिंग की रूपरेखा सामने आई थी।
हालांकि, ये तारीखें तब तक संभावित ही मानी जाएंगी जब तक आयोग की ओर से औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हो जाती। अदालत ने 15 नवंबर 2026 तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की समयसीमा तय कर रखी है, जिसके चलते आयोग के लिए अब हर कदम तयशुदा कैलेंडर के हिसाब से उठाना अनिवार्य होगा।
प्रदेश में इतने पदों पर होना है चुनाव
ग्रामीण राजस्थान के इन चुनावों में बड़े पैमाने पर जनप्रतिनिधियों का चयन होना है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें, 457 पंचायत समितियां और 41 जिला परिषदें हैं।
इन निकायों के तहत कुल 1,40,237 वार्ड सदस्यों और 14,403 सरपंचों का निर्वाचन होगा। इनमें 1,30,589 ग्राम पंचायत वार्ड पंच, 8,245 पंचायत समिति सदस्य और 1,403 जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। चुनाव परिणामों के बाद निर्वाचित जिला परिषद सदस्य 41 जिला प्रमुखों का और पंचायत समिति सदस्य 457 प्रधानों का चुनाव करेंगे।
ईवीएम और मतपत्र दोनों का होगा इस्तेमाल
मतदान की व्यवस्था को लेकर आयोग के सामने दोहरी चुनौती रहेगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम (EVM) के जरिए कराए जाएंगे, जबकि जमीनी स्तर पर ग्राम पंचायतों में पंच और सरपंच के चुनाव पारंपरिक मतपत्र (Ballot Paper) से संपन्न होंगे। इसके लिए मतदान केंद्रों, पोलिंग स्टाफ और सुरक्षा बलों की तैनाती पर प्रशासनिक स्तर पर अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
इससे पहले जिला प्रमुख पदों के आरक्षण की लॉटरी अगस्त में निकाली जा चुकी है। इसके बाद 23 सितंबर को जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों और प्रधान पदों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हुई। वहीं, सरपंच और वार्ड पंच पदों का आरक्षण भी पूरा हो चुका है, जिससे पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के नियम के तहत हजारों गांवों में संभावित प्रत्याशियों की तस्वीर पहले ही साफ हो चुकी है।
