मध्य प्रदेश में आवागमन और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने वाले 600 किलोमीटर लंबे इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है। मंगलवार को हुई मोहन कैबिनेट की बैठक में इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर मुहर लग गई। करीब 18,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस मेगा कॉरिडोर के जरिए राज्य के तीन बड़े शहर आपस में जुड़ेंगे, वहीं यात्रा का समय भी आधा रह जाएगा।
परियोजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार के स्वामित्व वाली एक नई कंपनी का गठन किया जाएगा, जिसका नाम 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड' तय किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के बाद खुद इस फैसले की जानकारी दी है।
दो चरणों में होगा एक्सप्रेसवे का निर्माण
यह मेगा एक्सप्रेसवे दो चरणों में तैयार किया जाएगा। पहले चरण में भोपाल से इंदौर के बीच 161 किलोमीटर लंबा छह लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनेगा। इस रूट के तैयार होने के बाद इंदौर और भोपाल के बीच का सफर महज 2 घंटे में पूरा हो जाएगा। वर्तमान में देवास और सीहोर के शहरी इलाकों से गुजरने वाले ट्रैफिक की वजह से इसी दूरी को तय करने में चार घंटे तक का समय लगता है।
दूसरा चरण भोपाल से जबलपुर के बीच का है, जिसकी लंबाई 255 किलोमीटर होगी। भोपाल से रायसेन, सागर और दमोह होते हुए जबलपुर तक बनने वाले इस एक्सप्रेसवे के बाद राजधानी से संस्कारधानी का सफर छह घंटे से घटकर तीन घंटे का रह जाएगा। पूरे कॉरिडोर के बनने के बाद इंदौर से जबलपुर तक की पूरी यात्रा मात्र 8 घंटे में सिमट जाएगी, जबकि अभी इस सफर में करीब 14 घंटे का वक्त लगता है।
रूट और प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पार्क
इस एक्सप्रेसवे के रूट में इंदौर, देवास, सीहोर, भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर, दमोह और जबलपुर जिले शामिल हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत कई बड़े औद्योगिक पार्क भी विकसित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक नया ग्रोथ इंजन मिलने की उम्मीद है।
- आष्टा औद्योगिक पार्क: भोपाल से इंदौर के बीच सीहोर जिले के आष्टा में 21,000 एकड़ जमीन पर मल्टी-प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क बनाने का प्रस्ताव है।
- धर्मपुरा पार्क: भोपाल से जबलपुर के रूट पर धर्मपुरा में 954 एकड़ भूमि पर पार्क बनेगा, जिस पर 576 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह लोकेशन जबलपुर, सिवनी, नागपुर और भोपाल के बेहद नजदीक है।
निवेश और रोजगार पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी में बताया कि कंपनी की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता वह खुद करेंगे, ताकि विभागों के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित निर्णय लिए जा सकें। परियोजना के पहले चरण में 3,000 से 1,0000 एकड़ भूमि विकसित करने का लक्ष्य है।
राज्य सरकार का अनुमान है कि आगामी तीन वर्षों में इस प्रोजेक्ट के जरिए 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आएगा और 6 लाख से ज्यादा नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। कॉरिडोर के आसपास की जमीनों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए सड़क के किनारे ही औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर मुख्य जोर रहेगा।
