जयपुर के शहीद स्मारक पर पिछले दो दिन से जारी तृतीय श्रेणी शिक्षकों का धरना खत्म होने की उम्मीद बंध गई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, शिक्षा सचिव और शिक्षक प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में नई तबादला पॉलिसी को लेकर सहमति बन गई है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि 31 दिसंबर से पहले नई नीति तैयार कर ली जाएगी, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर 1 जनवरी 2027 से इसे लागू किया जाएगा।
इस बीच, शिक्षकों का एक वर्ग सरकार के इस आश्वासन से संतुष्ट नजर आ रहा है, तो कई शिक्षक अभी भी विरोध पर अड़े हैं। धरने पर बैठे शिक्षकों का साफ कहना है कि जब तक तबादला नीति का आधिकारिक और लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक शहीद स्मारक पर प्रदर्शन जारी रहेगा। इससे पहले सरकार और शिक्षक प्रतिनिधियों के बीच दो दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी, जिसके बाद आंदोलन और तेज हो गया था।
सुप्रीम कोर्ट के पेंच और कानूनी अड़चन
सरकार ने शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में यह स्पष्ट किया है कि तबादलों से जुड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अदालत की प्रक्रिया पूरी होने और हरी झंडी मिलने के बाद ही नई नीति के तहत ट्रांसफर की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
यही वजह है कि कई शिक्षक सरकार के इस कदम को महज आश्वासन मान रहे हैं। शिक्षक संघर्ष समिति से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक लिखित आदेश हाथ में नहीं आ जाता, तब तक धरने से उठने का सवाल ही नहीं उठता। आंदोलन में पूरे राजस्थान से आए शिक्षक शामिल हैं।
क्यों भड़का था शिक्षकों का गुस्सा
शहीद स्मारक पर चल रहे इस प्रदर्शन की मुख्य वजह तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ कथित सौतेला व्यवहार रही है। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार ने प्रिंसिपल, फर्स्ट ग्रेड और सेकंड ग्रेड शिक्षकों के ट्रांसफर तो कर दिए, लेकिन तृतीय श्रेणी शिक्षकों के मामले में लगातार देरी की जा रही है।
इसी भेदभाव और लंबे इंतजार से नाराज होकर शिक्षकों ने मोर्चा खोला था। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और गरमा गई थी जब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने तत्काल ट्रांसफर शुरू करने से असमर्थता जताई थी। इसके बाद शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सीधे हस्तक्षेप की मांग की थी।
