कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार करते हुए पार्टी छोड़ने के संकेत दिए हैं। सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने साफ किया कि वह मौजूदा कार्यशैली के साथ आगे काम नहीं कर सकेंगे। हालांकि, उन्होंने अभी तक आधिकारिक रूप से इस्तीफा नहीं सौंपा है।
इस घटनाक्रम से पहले ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उनके बयानों को अनुशासनहीनता मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर दी थी। पार्टी की ओर से औपचारिक निर्णय लिए जाने से ठीक पहले विश्वेंद्र सिंह के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज कर दी है।
"दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत बेहतर"
विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में पार्टी नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष को संबोधित करते हुए अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा कि उनका सार्वजनिक जीवन एक खुली किताब की तरह बेदाग रहा है और वह अपने दामन पर कभी दाग नहीं लगने देंगे।
उन्होंने पोस्ट में लिखा- "ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है। मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से समझौता नहीं किया, उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं। मैं शायद अब आपकी गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाऊंगा।"
इस पोस्ट के तुरंत बाद उन्होंने एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें फिल्म 'दलाल' का गाना 'ठहरे हुए पानी में कंकड़ ना मार...' पृष्ठभूमि में बज रहा था। इस कदम को उनके समर्थकों द्वारा शक्ति प्रदर्शन और सीधे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
डोटासरा बोले- बिना पक्ष सुने नहीं होगी कार्रवाई
विवाद बढ़ने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मीडिया से बातचीत में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी सोशल मीडिया के बयानों के आधार पर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाती है।
डोटासरा ने कहा- "हम सोशल मीडिया के आधार पर कोई फैसला नहीं करते। हम पहले उनका पक्ष सुनेंगे, उनकी तकलीफ क्या है। हम कमेटी बनाकर जांच करवाएंगे और उसके बाद ही कोई फैसला करेंगे।"
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, डोटासरा के खिलाफ विश्वेंद्र सिंह के पिछले बयानों के बाद से ही आंतरिक स्तर पर नाराजगी थी। 30 सितंबर को विश्वेंद्र ने डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि शिक्षा मंत्री रहते हुए रीट परीक्षा में धांधली की गई और सत्ता का दुरुपयोग कर परिवार के सदस्यों को आरएएस इंटरव्यू में अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा, शहरी निकाय चुनावों में भरतपुर और डीग जिलों में कांग्रेस की हार के लिए भी उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय जिलाध्यक्षों को जिम्मेदार ठहराया था।
कार्यकर्ताओं में आक्रोश और आगे की स्थिति
विश्वेंद्र सिंह ने अपने समर्थकों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ तथाकथित छुटभैया नेताओं की अनर्गल बयानबाजी के कारण उनके कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह हमेशा सच के साथ खड़े रहे हैं और चापलूसी की संस्कृति के आगे कभी नहीं झुकेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि सच को सच कहना और गलत का विरोध करना पाप है, तो वह इस गलती को बार-बार दोहराएंगे। उनके इस रुख के बाद अब सबकी नजरें कांग्रेस हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं कि पार्टी उन्हें निष्कासित करती है या डोटासरा के साथ कोई मध्यस्थता का प्रयास होता है।
