हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की शुरुआत के साथ ही व्रतों का क्रम तेज हो गया है। इस कड़ी में भगवान शिव की आराधना को समर्पित प्रदोष व्रत को लेकर भक्तों में उत्साह है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखे जाने वाले इस व्रत से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की मान्यता जुड़ी हुई है। कार्तिक माह में पड़ने वाले शुक्र प्रदोष और रवि प्रदोष की तिथियों, शुभ मुहूर्तों और पूजा पद्धतियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
शुक्र प्रदोष व्रत: तारीख और मुहूर्त
पंचांग के गणना के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा। प्रदोष काल की मान्यता को ध्यान में रखते हुए यह व्रत 6 नवंबर को रखा जाएगा।
शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन शिवाराधना के लिए शाम 5 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 40 मिनट तक का समय सबसे उपयुक्त रहेगा। इस अवधि में भक्त विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन कर सकेंगे।
रवि प्रदोष व्रत: तिथि और समय
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 22 नवंबर को सुबह 4 बजकर 56 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 23 नवंबर की रात 2 बजकर 36 मिनट पर होगा। प्रदोष काल के आधार पर यह व्रत 22 नवंबर, रविवार को रखा जाएगा, जिसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा।
रविवार के दिन पड़ने वाले इस व्रत में पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 4 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर रात 7 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शिव मंदिरों और घरों में विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान किया जाता है और शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई कर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित किया जाता है।
पूजा की शुरुआत शिवलिंग के जलाभिषेक से होती है जिसमें दूध और पंचामृत का उपयोग किया जाता है। इसके बाद शिवजी को चंदन का लेप लगाकर बेलपत्र, श्वेत फूल और धतूरा अर्पित किया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार शक्कर और घी से बनी मिठाई का भोग लगाना उत्तम माना गया है।
अनुष्ठान के दौरान शिव मंत्रों के जाप के साथ शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने के बाद घी का दीपक जलाकर आरती की जाती है और दिनभर उपवास रखते हुए आराध्य का स्मरण किया जाता है।
