कमलेश एनकाउंटर केस में 24 पुलिसकर्मी बरी
राजस्थान के बहुचर्चित कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले के हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक जोधपुर सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए आईपीएस आनंद शर्मा समेत 24 पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने अपने फैसले में माना कि यह फर्जी एनकाउंटर नहीं था, बल्कि पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी। मामला अप्रैल 2021 का है, जब बाड़मेर में पुलिस टीम दबिश देने पहुंची थी। पुलिस के अनुसार, कमलेश प्रजापत ने अपनी गाड़ी से पुलिसकर्मियों को कुचलने का प्रयास किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी थी। जैसे ही पुलिस कमांडोज ने कमलेश के घर को घेरा, उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय भागने का प्रयास किया। कमलेश ने अपनी एक्सयूवी (XUV) गाड़ी को स्टार्ट किया और तेज रफ्तार में अपने ही घर का मुख्य लोहे का गेट तोड़ते हुए बाहर निकलने की कोशिश की। इस दौरान उसने वहां तैनात पुलिसकर्मियों और कमांडोज के ऊपर सीधे गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया, जिससे कई जवानों की जान बाल-बाल बची। बाद में सीबीआई जांच ने भी पुलिस की कार्रवाई को सही मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। हालांकि 2025 में एसीजेएम कोर्ट ने 24 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला चलाने के आदेश दिए थे, लेकिन अब सेशन कोर्ट ने उस आदेश को खारिज कर दिया है। इस फैसले से पूर्व मंत्री हरीश चौधरी को भी बड़ी राजनीतिक राहत मिली है। इस फैसले के आने के बाद पिछले 5 वर्षों से मानसिक और कानूनी तनाव झेल रहे राजस्थान पुलिस के अधिकारियों और जवानों ने बड़ी राहत की सांस ली है। जैसे ही पुलिस कमांडोज ने कमलेश के घर को घेरा, उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय भागने का प्रयास किया।

