खंडवा नगर निगम क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी की ओर से लगाए गए विरोध प्रदर्शन के फ्लेक्स और बैनर हटाए जाने पर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने निगम प्रशासन और सत्ताधारी पार्टी पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बताया है। इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेसी कार्यकर्ता नगर निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और हटाए गए बैनर प्रदर्शित किए।
मामला आगामी 7 अक्टूबर को होने वाले कांग्रेस के निगम घेराव प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी ने शहर के विभिन्न हिस्सों में होर्डिंग लगवाए थे, जिन पर निगम में कथित भ्रष्टाचार, सीवरेज लाइन की बदहाली, आवारा पशुओं व कुत्तों के आतंक और पेयजल संकट जैसे मुद्दों का जिक्र था। कांग्रेस का दावा है कि इसके लिए अधिकृत वेंडर को तय भुगतान किया गया था, लेकिन निगम के दबाव में आकर वेंडर ने बैनर हटवा दिए।
वेंडर को धमकाने और माफी मांगने का आरोप
नगर निगम पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर और शहर अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया कि निगम के इशारे पर अधिकृत वेंडर को धमकाया गया और बैनर उतरवाए गए।
नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर ने कहा- "हमने निगम के अधिकृत वेंडर को बैनर लगाने के पैसे दिए थे, लेकिन निगम और बीजेपी के लोग डर के मारे उन्हें लगाने नहीं दे रहे हैं। वेंडर से बाद में हमसे माफी भी मंगवाई गई। जनता की बुनियादी समस्याओं को लेकर होने वाले हमारे विरोध प्रदर्शन से निगम प्रशासन घबराया हुआ है।"
7 अक्टूबर को बड़े आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि निगम प्रशासन जनता के तीखे सवालों के जवाब देने से बच रहा है। बैनर हटाने की इस कार्रवाई से बैकफुट पर आने के बजाय पार्टी ने अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं।
कांग्रेस ने ऐलान किया है कि तय कार्यक्रम के अनुसार 7 अक्टूबर को निगम का बड़ा घेराव किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि शहर की सीवरेज व्यवस्था, आवारा मवेशियों की समस्या और पानी के संकट पर निगम को जनता के सामने जवाब देना ही होगा।
