लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच सऊदी अरब ने सीधे सैन्य कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है। सऊदी समर्थित यमनी सेना ने हूतियों के खिलाफ जवाबी अभियान शुरू कर दिया है, जबकि पाकिस्तान और तुर्किये भी सऊदी की सुरक्षा के लिए अपने सैन्य बल तैनात करने की प्रक्रिया में हैं।
यह रणनीतिक कदम ऐसे समय उठाया गया है जब समुद्री व्यापार के अहम रास्तों पर सुरक्षा का संकट गहरा गया था। रियाद में सोमवार को मक्का रक्षा समझौते की आपात बैठक बुलाई गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रक्षा व्यवस्था को सक्रिय करने पर मुहर लगाई, जिसके तहत सऊदी क्षेत्र में सैन्य बलों की तेजी से तैनाती की जाएगी।
इससे पहले सितंबर में सऊदी अरब ने पाकिस्तान से सैन्य मदद मांगी थी, जिसे तब ठुकरा दिया गया था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी पक्ष ने तब स्पष्ट किया था कि उसकी सेना किसी अन्य देश की भूमि पर प्रत्यक्ष युद्ध में शामिल नहीं होगी। हालांकि, अब क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण बदलने के बाद स्थिति में बदलाव आया है।
बाब अल-मंदेब और मोचा पर नियंत्रण की जंग
सितंबर के दौरान हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर आक्रामक रुख अपनाते हुए मोचा शहर और सामरिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंदेब के आसपास के इलाकों पर कब्जा जमा लिया था। इस कब्जे से इस प्रमुख समुद्री मार्ग पर उनका दबदबा काफी बढ़ गया था।
हालाँकि, 5 अक्टूबर को सऊदी समर्थित यमनी सेना ने पलटवार करते हुए बड़ा अभियान शुरू किया। सरकारी बलों ने बाब अल-मंदेब के पास धुबाब इलाके समेत कई ठिकानों को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने का दावा किया। इसके बाद सैन्य टुकड़ियां मोचा की तरफ बढ़ीं और यमनी सरकार ने उस पर भी फिर से कब्जा हासिल कर लिया। रॉयटर्स के अनुसार, सरकारी बलों ने विद्रोहियों को पिछले महीने छीने गए अधिकांश क्षेत्रों से खदेड़ दिया है।
यमन में एक लाख सैनिकों को उतारने की तैयारी
समुद्री व्यापार के रास्तों को सुरक्षित करने और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से मुक्त कराने के लिए सऊदी अरब यमन में एक लाख से अधिक सैनिकों को उतारने की योजना बना रहा है। इस बड़े सैन्य अभियान के तहत दो मुख्य विकल्प तैयार किए गए हैं।
पहले विकल्प के तहत बाब अल-मंदेब के पास सीमित और लक्षित हमले कर समुद्री मार्ग को सुरक्षित किया जाएगा। वहीं, दूसरे विकल्प में यमन के कई प्रमुख क्षेत्रों में एक साथ बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने की रूपरेखा है, जिसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हैं। इस पूरे सैन्य अभियान का नेतृत्व यमनी सेना करेगी जिसे सऊदी अरब का जमीनी और रसद समर्थन मिलेगा, जबकि आवश्यकता पड़ने पर सऊदी वायुसेना हवाई हमले भी करेगी।
