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मदन राठौड़ का गहलोत पर तीखा हमला

आपणो राजस्थान
मदन राठौड़ का गहलोत पर तीखा हमला

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा भाजपा पर प्रतिबंध लगाने संबंधी दिए गए बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह बयान कांग्रेस की उसी तानाशाही मानसिकता का जीवंत उदाहरण है, जिसने देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र का गला घोंटा था। गहलोत ने यह कहकर कि यदि इंदिरा गांधी आज होतीं तो भाजपा पर प्रतिबंध लगा देतीं, अनजाने में कांग्रेस का असली चेहरा देश के सामने उजागर कर दिया है। राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र की हत्या की थी,  उसका खामियाजा भी कांग्रेस पार्टी ने उठाया था।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत का बयान साबित करता है कि कांग्रेस आज भी उस मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई है। तीन बार मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहने वाले नेता द्वारा इस प्रकार की हल्की और गैर-जिम्मेदाराना शब्दावली का प्रयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। गहलोत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या लोकतंत्र में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार और देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध लगाने की बात किसी वरिष्ठ नेता को शोभा देती है? वे भाजपा और आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या वे 1975 को भूल गए हैं, जब कांग्रेस ने लोकतंत्र की हत्या की थी? इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद सत्ता बचाने के लिए आपातकाल लगाया गया था और उसका राजनीतिक खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा था। देश की जनता ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर कर लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की थी। 25 जून देश में आपातकाल का काला दिन आ रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि गहलोत के बयान यह संकेत देते हैं कि कांग्रेस आज भी उसी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई है। ऐसा प्रतीत होता है कि वे केवल सुर्खियों में बने रहने या अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए इस प्रकार की बयानबाजी कर रहे हैं। इससे उन्हें क्षणिक राजनीतिक चर्चा भले मिल जाए, लेकिन जनता के बीच उनकी छवि लगातार धूमिल हो रही है। लोकतंत्र का अर्थ ही वे समझने को तैयार नहीं हैं। लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार और राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने की बात करना उनकी विकृत राजनीतिक सोच को दर्शाता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि गहलोत द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत का उल्लेख करना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। क्या राम मंदिर का नाम लेना अपराध है? क्या भगवान राम का स्मरण करना अपराध है? भारतीय संस्कृति और करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक भगवान राम के नाम पर आपत्ति जताना कांग्रेस की मानसिकता को उजागर करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस नेतृत्व की न तो राम में आस्था है और न ही लोकतंत्र में पूर्ण विश्वास। गहलोत का बयान यह प्रश्न खड़ा करता है कि क्या वे आज भी लोकतंत्र को सीमित करने और विरोधी विचारों को दबाने की मानसिकता रखते हैं? लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कर सकता। यह सोच तानाशाही और डिक्टेटरशिप की मानसिकता को दर्शाती है। देश की जनता आज पूरी तरह जागरूक है और भारत में लोकतंत्र की हत्या करने की कल्पना भी कोई नहीं कर सकता।

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