शेखावाटी का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल लोहार्गल धाम देश विदेश के करोड़ों सनातनियों की आस्था के प्रतीक लोहार्गल धाम से शनिवार दोपहर बाद 4.15 बजे माल केतु की 24 कोसीय परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। लोहार्गल धाम सूर्य मंदिर में भगवान सूर्यनारायण का अभिषेक किया गया व महाआरती हुई। लोहार्गल के खाकी अखाड़ा से आई ठाकुरजी की पालकी की सूर्य कुंड गौमुख के पास पूजा अर्चना की गई। पूजा के बाद सूर्य कुंड की परिक्रमा कर ठाकुरजी की पालकी खाकी अखाड़ा के महंत घनश्यामदास के नेतृत्व में करीब 200 साधु संत पालकी को लेकर परिक्रमा की अगुवाई में निकले। लोहार्गल धाम पहुंचे परिक्रमार्थी श्रद्धालुओं ने सूर्य कुंड में स्नान किया व जयकारों के साथ 24 कोसीय परिक्रमा के लिए निकले। सूर्यकुंड से रवाना होकर गोल्याणा शिव गोरां मंदिर, चिराणा गांव के चारभुजा मंदिर में अल्प विश्राम के बाद चिराणा घाटी होते हुए ठाकुरजी की पालकी व परिक्रमार्थी श्रद्धालुओं का कारवां रात को किरोड़ी धाम के पंचमुखी बालाजी मंदिर पहुंचा। मंदिर में पालकी व साधु संतों ने रात्रि विश्राम किया। परिक्रमा में चल रहे श्रद्धालुओं ने पंचमुखी बालाजी मंदिर परिसर में बने विश्रामगृह में पड़ाव डाला। रविवार को किरोड़ी धाम के पवित्र जलकुंडों में स्नान कर श्रद्धालु मंदिरों में पूजा अर्चना करेंगे। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे ठाकुरजी की पालकी के साथ परिक्रमा यात्रा कोट बांध होते हुए अगले पड़ाव सिद्धपीठ शाकंभरी धाम के लिए रवाना होगी।
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नागवंश के राजा करकोटक ने भगवान शिव की उपासना की थी ----
वर्तमान किरोड़ी धाम जो पौराणिक काल में करकोटिका के नाम से जाना जाता था। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ब्रह्म सरोवर की इस दूसरी धारा के अंतिम छोर पर पवित्र जल के कुंड के पास नागवंश के राजा करकोटक ने भगवान शिव की उपासना की थी। इसीलिए इस स्थान का नाम करकोटिका पड़ा। करकोटक ने यहां शिवलिंग की स्थापना की व हनुमानजी का मंदिर भी बनवाया। जो आज भी मौजूद हैं। दोनों ही मंदिरों में पूजा पाठ होती है। लेकिन श्रद्धालुओं को जानकारी का अभाव व प्रशासनिक उदासीनता के चलते मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में हैं। किरोड़ी धाम में अधिपति देवता के रूप में गिरधारीजी का मंदिर बना हुआ हैं। जिसमें भगवान कृष्ण का गिरिधर मुद्रा रूप स्थापित है साथ में राधाजी की मूर्ति भी स्थापित हैं। गिरधारीजी मंदिर का निर्माण 4 सौ वर्ष पूर्व उदयपुरवाटी के शासक टोडरमल के मुसाहिब (वित्तमंत्री) मुंशा महाजन ने विक्रम संवत 1684 में अक्षय तृतीय के दिन शुरू करवाया था। दौरान पालकी के साथ दयालदास महाराज,गणेश दास महाराज, बलबीर दास जेरठी, भोमदास महाराज, राजेश्वरी दास ,राम आधार दास , विसमेश दास महाराज, गिरी दास महाराज,कमल दास महाराज ,आनंद दास, सुरेंद्र दास, श्याम दास ,कल्याण दास ,राजू दास, श्याम दास एडवोकेट नवीन काजल, लोकेश ,सियाग आदि संत महंत ठाकुर जी की पालकी के साथ परिक्रमा कर रहे हैं।
