मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने क्षेत्र के 9 देशों में रह रहे अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। इराक, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब, ईरान, कतर, लेबनान, कुवैत और जॉर्डन में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को अधिक सतर्क रहने और उड़ानों से जुड़ी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब व्हाइट हाउस ने क्षेत्र में सुरक्षा गतिविधियों को तेज कर दिया है।
रशिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी B-1B लांसर बॉम्बर ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से फुल आफ्टरबर्नर के साथ उड़ान भरकर मिडिल-ईस्ट की दिशा में रुख किया है। वहीं, ईरान के प्रेस TV ने उत्तर-पूर्वी सीरिया के अल-हसकाह स्थित खाराब अल-जिर एयरबेस के पास एयर डिफेंस एक्टिविटी की सूचना दी है। इसी बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपना कैंप डेविड दौरा एक दिन पहले बीच में ही छोड़कर शनिवार शाम व्हाइट हाउस लौट आए। हालांकि, उनकी इस अचानक वापसी के पीछे के कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।
ईरान की 7 शर्तें और हूती हमला
तनाव के इस माहौल के बीच ईरान ने संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका के सामने 7 शर्तें रखी हैं। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए ईरान की ये शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं, और अब तेहरान राष्ट्रपति ट्रम्प के जवाब का इंतजार कर रहा है।
रेजाई ने कहा कि इन शर्तों में सभी मोर्चों पर तुरंत युद्ध रोकना, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड को बहाल करना और नौसैनिक नाकाबंदी को पूरी तरह खत्म करना प्रमुख रूप से शामिल है। इन वार्ताओं के बीच क्षेत्रीय मोर्चे पर संघर्ष भी तेज हो गया है। सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी सेना ने राजधानी रियाद पर दागी गई हूती बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया। दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता याह्या सरी ने पुष्टि की कि रियाद और सऊदी तेल कंपनी अरामको की यानबू स्थित सुविधाओं को निशाना बनाकर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे गए थे।
आंतरिक मोर्चे पर मानवाधिकार और आर्थिक संकट
क्षेत्रीय सैन्य तनाव के बीच ईरान के भीतर आंतरिक संकट भी गहराता जा रहा है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नर्गिस मोहम्मदी ने एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में कहा कि देश में चल रहे संघर्ष, गंभीर आर्थिक संकट और सरकारी दमन का खामियाजा सीधे तौर पर आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
मोहम्मदी ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में नागरिकों पर सरकारी पाबंदियां और दबाव काफी बढ़ गया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद ईरानी युवा अपने अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं और सरकारी नीतियों का विरोध करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
