मंदसौर। शहर में सीवरेज लाइन डालने के बाद छोड़े गए गड्ढे और अधूरी सड़कें स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बन गई हैं। शहर की श्रीनाथ बिहार कॉलोनी में सड़क पर बने गहरे गड्ढे में आज एक पानी का टैंकर फंस गया, जिससे आवाजाही ठप हो गई। इस घटना ने एक बार फिर सीवरेज कार्य के बाद सड़कों की मरम्मत कराने के दावों की पोल खोल दी है।
विभिन्न इलाकों में सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कें तोड़ी गई थीं। काम पूरा होने के नाम पर सिर्फ मिट्टी डालकर गड्ढे भर दिए गए, लेकिन डामरीकरण या पक्की मरम्मत का काम अब तक अधूरा है। इस लापरवाही के कारण रोजाना दोपहिया वाहन चालक गिर रहे हैं और बड़े वाहनों के फंसने का सिलसिला जारी है।
वाहनों की आवाजाही पर संकट
श्रीनाथ बिहार कॉलोनी के अलावा कई अन्य कॉलोनियों में भी हालात ऐसे ही हैं। कभी यहां पानी के टैंकर तो कभी ट्रैक्टर गड्ढों और कीचड़ में फंस जाते हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इन रास्तों से स्कूल बसों और वैन का गुजरना भी जोखिम भरा हो गया है।
उबड़-खाबड़ रास्तों और अनियोजित खुदाई के कारण बच्चों और बुजुर्गों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाने से गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे हादसों की आशंका हर वक्त बनी रहती है।
दिवाली नजदीक, रहवासियों की बढ़ी चिंता
त्योहारी सीजन सिर पर है और दिवाली में कुछ ही दिन बाकी हैं। ऐसे में घरों के बाहर खुदी पड़ी सड़कों को लेकर रहवासियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। त्योहार के दौरान बाजारों और गलियों में आवाजाही काफी बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि यदि त्योहार से पहले सड़कों की मरम्मत नहीं हुई, तो खरीदारी और मेहमानों का आना-जाना भी मुश्किल हो जाएगा।
नगर पालिका की कार्यशैली पर उठे सवाल
विकास कार्यों के नाम पर जनता को हो रही इस परेशानी को लेकर स्थानीय स्तर पर रोष है। रहवासियों का कहना है कि एजेंसी और नगर पालिका प्रशासन ने पाइपलाइन तो बिछा दी, लेकिन सड़क को मूल स्वरूप में लाने की सुधि नहीं ली।
"सीवरेज के नाम पर पूरे इलाके की सड़कें खोद दी गईं। महीनों बीत जाने के बाद भी मरम्मत नहीं हुई है। अब त्योहार के दिनों में हमारा घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है।" — स्थानीय निवासी, श्रीनाथ बिहार कॉलोनी
फिलहाल, स्थानीय लोग नगर पालिका और जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन त्योहार से पहले सड़कों को दुरुस्त करवा पाता है या लोगों को इसी बदहाली के बीच दिवाली मनानी होगी।
