मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर स्थित एकात्म धाम में भव्य पंचायतन मंदिर का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित इस समारोह में षड्दर्शन संत मंडल के संतों और विद्वान आचार्यों की उपस्थिति में 45 पवित्र शिलाओं का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन किया गया।
इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि वर्ष 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ से पूर्व एक भव्य एकात्म यात्रा निकाली जाएगी, जिसका समापन सिंहस्थ के दौरान होगा। यह यात्रा देश और दुनिया तक भारतीय सनातन ज्ञान और संत परंपरा का संदेश पहुंचाएगी।
नागर शैली और सोमतिलक वास्तुकला की अनूठी मिसाल
प्राचीन पंचायतन शैली पर तैयार हो रहे इस मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा, जबकि इसके चारों कोनों पर भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय स्थापित किए जाएंगे। मंदिर का मुख्य शिखर 'सोमतिलक' शैली में और गर्भगृह 'सर्वतोभद्र' शैली में आकार ले रहा है, जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था होगी।
परिसर में 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान 'जगति' पर कुल 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और 8 लघु संवर्णा खड़े किए जाएंगे। इसके मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद होगा। निर्माण कार्य में लगभग 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है और पूरा मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा।
आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकात्मता का केंद्र
शिलान्यास समारोह के बाद संतों और अतिथियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ओंकारेश्वर में आकार ले रहा एकात्म धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक एकात्मता का प्रमुख केंद्र बनेगा। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए पंचायतन पूजन की परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों के आशीर्वाद से ओंकारेश्वर और उज्जैन दोनों ही धाम आंतरिक चेतना के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यह दिव्य धाम आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और चरित्र निर्माण की प्रेरणा देता रहेगा। आंध्रप्रदेश के श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् धर्मगिरि के प्राचार्य के.एस.एस. अवधानी और दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम् कर्नाटक के आचार्यों ने इस अनुष्ठान को संपन्न कराया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत, स्थानीय जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु मौजूद रहे।
