पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर शनिवार को दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच भीषण झड़प हुई। इस गोलाबारी में 7 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है। झड़प के बाद पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई में कई अफगान तालिबान लड़ाकों को ढेर कर दिया और उनका एक सैन्य ठिकाना भी पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
यह ताजा सैन्य टकराव दोनों देशों के बीच विवादित डूरंड लाइन पर हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, अफगानिस्तान में सीमा पार से होने वाली हिंसा के कारण इस साल अब तक 1100 से ज्यादा आम नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे
संघर्ष की शुरुआत को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक-दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, अफगान सीमा रक्षकों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तर-पश्चिमी कुर्रम जिले में स्थित उसके चेकपॉइंट्स पर बिना किसी उकसावे के गोलीबारी शुरू कर दी।
दूसरी ओर, अफगान सुरक्षा सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए पाकिस्तान पर ही संघर्ष भड़काने का आरोप मढ़ा है। उनके अनुसार, पाकिस्तानी सैनिकों ने पहले फायरिंग की और वे बिना अनुमति के सीमा पर चौकियां बनाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके जवाब में अफगान बलों ने मोर्चा संभाला।
तालिबान बेस कैंप नष्ट करने का दावा
पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने शनिवार की इस हिंसक झड़प के दौरान एक अन्य कार्रवाई में अफगान तालिबान के कई लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान बलों ने आतंकवादियों को पाकिस्तानी क्षेत्र में घुसपैठ कराने में मदद के लिए गोलीबारी की थी, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने भारी हथियारों से जवाबी कार्रवाई करते हुए एक तालिबान बेस कैंप को नेस्तनाबूद कर दिया।
क्या है डूरंड लाइन और TTP का विवाद?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की जड़ें काफी गहरी हैं। पिछले साल अक्टूबर में सीमा पर हुई बड़ी झड़पों के बाद से दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगातार सैन्य टकराव की स्थिति बनी हुई है। इस तनातनी की सबसे बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) संगठन है।
इस्लामाबाद लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान प्रशासन TTP को अपनी जमीन पर पनाह देता है, जहां से उसके लड़ाके पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की साजिश रचते हैं। हालांकि, काबुल की तालिबान सरकार इन आरोपों को हमेशा से खारिज करती आई है। TTP और अफगान तालिबान वैचारिक रूप से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। साल 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के दौरान पाकिस्तान द्वारा अमेरिका का साथ दिए जाने के बाद से TTP ने पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ हथियार उठा लिए थे। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद से पाकिस्तानी सेना ने TTP के ठिकानों को निशाना बनाकर सीमा पार कई बार हवाई और जमीनी हमले किए हैं।
