वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को नवग्रहों का सेनापति और एक क्रूर ग्रह माना गया है। कुंडली में मंगल की स्थिति यदि अनुकूल न हो, तो जातक को विवाह में विलंब, दांपत्य जीवन में तनाव और कर्ज जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार, जिस जातक की जन्मकुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित होता है, उसे मांगलिक माना जाता है। ऐसे जातकों के जीवन में वैवाहिक जीवन से जुड़ी दिक्कतें और आर्थिक परेशानियां अक्सर बनी रहती हैं।
मांगलिक दोष के अशुभ प्रभाव को कम करने और मंगल देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ज्योतिषीय उपायों में हनुमान चालीसा का पाठ और विशेष मंत्रों के जाप की सलाह दी जाती है। इस बीच, मांगलिक दोष से मुक्ति पाने का एक खास अवसर आ रहा है। आगामी 8 सितंबर को त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मंगलवार के दिन प्रदोष तिथि पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है, जिसका ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विशेष महत्व माना गया है।
भौम प्रदोष व्रत और पंचांग की स्थिति
पंचांग के गणना के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर को दोपहर 2:42 बजे शुरू होगी और इसका समापन 9 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे होगा। हालांकि, उदया तिथि के अनुसार त्रयोदशी 9 सितंबर को पड़ेगी, लेकिन प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के मुताबिक, प्रदोष काल की प्रधानता को देखते हुए व्रत 8 सितंबर को रखना ही शास्त्रसंगत और शुभ रहेगा। चूंकि इस बार यह तिथि मंगलवार को है, इसलिए इसे भौम प्रदोष के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन शिव पूजा के साथ-साथ मंगल देव की उपासना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
भौम प्रदोष पर शिव-मंगल आराधना के उपाय
भौम प्रदोष के दिन शिव परिवार की पूजा करने से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों में कमी आती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ मंगल देव और हनुमान जी की भी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। भौम प्रदोष व्रत का महत्व और मांगलिक दोष निवारण के लिए इस दिन विशेष रूप से शिव मंदिर जाकर रुद्राभिषेक या जलाभिषेक करना फलदायी माना गया है।
पूजा के दौरान साधक को अपनी समस्याओं से मुक्ति के लिए मंगल देव और भगवान शिव से प्रार्थना करनी चाहिए। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई शिव आराधना से जीवन के समस्त सुखों की प्राप्ति होती है और कुंडली के दोष शांत होते हैं।
मंगल ग्रह के बीज मंत्र और जाप का विधान
कुंडली में मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए मंगलवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन विशेष रूप से मंगल ग्रह के बीज मंत्रों का जाप करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके के अनुसार, मंगल देव के बीज मंत्र 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' के कुल 10 हजार जाप 40 दिनों के भीतर पूरे करने का विधान है। शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार से इन मंत्रों का जाप शुरू किया जा सकता है। पूरी निष्ठा और मनोयोग से किए गए इन मंत्र जाप से धीरे-धीरे मंगल दोष के प्रभाव कम होने लगते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।
