राजस्थान में साइबर ठगों ने ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) कहा जा रहा है। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों के बाद राज्य की साइबर क्राइम शाखा ने प्रदेश भर के कॉर्पोरेट दफ्तरों, प्राइवेट कंपनियों के मैनेजर्स, अकाउंटेंट्स और कर्मचारियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कंपनी के मालिक, एमडी या सीनियर अधिकारी का रूप धारण कर रहे हैं और व्हाट्सएप या ईमेल के जरिए कर्मचारियों से संपर्क साधकर अर्जेंट वित्तीय लेन-देन का दबाव बना रहे हैं।
कॉर्पोरेट और बिजनेस सेक्टर में तेजी से पैर पसार रहे इस नए फ्रॉड को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और कर्मचारियों से अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की गई है।
फर्जी आईडी और सोशल इंजीनियरिंग का खेल
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADG) साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने बताया कि यह गिरोह पूरी रिसर्च के बाद वारदात को अंजाम देता है। ठग सबसे पहले किसी लक्षित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के सोशल मीडिया प्रोफाइल, उनके आधिकारिक ईमेल पैटर्न और चल रहे प्रोजेक्ट्स की पूरी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद कर्मचारी के मोबाइल या ईमेल पर कंपनी के बॉस का असली नाम और फोटो लगाकर मैसेज भेजा जाता है।
मैसेज में यह दर्शाया जाता है कि बॉस किसी गुप्त मीटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए तुरंत किसी नए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर की जाए या अर्जेंट गिफ्ट कार्ड खरीदे जाएं। कर्मचारी अपने बॉस का नाम और जाने-पहचाने प्रोजेक्ट का जिक्र देखकर झांसे में आ जाते हैं और बिना वेरिफिकेशन के पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
वेब हाईजैक और ट्रोजन हॉर्स मालवेयर का इस्तेमाल
एडीजी वी.के. सिंह ने बताया कि अपराधी दफ्तरों के कंप्यूटर और लैपटॉप में ट्रोजन हॉर्स मालवेयर भेजकर सिस्टम का एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं। यदि सिस्टम में व्हाट्सएप वेब लॉग-इन है, तो अपराधी क्यूआर कोड हाईजैक करके सीधे कर्मचारी के व्हाट्सएप तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद नकली बॉस की डीपी लगाकर अर्जेंट पेमेंट के मैसेज भेजे जाते हैं। ठगी की इस रकम को तुरंत फर्जी म्यूल अकाउंट्स या क्रिप्टोकरेंसी में ट्रांसफर कर निकाला जाता है।
बॉस स्कैम को पहचानने के मुख्य संकेत
राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा ने कर्मचारियों को सतर्क करने के लिए कुछ स्पष्ट लक्षण साझा किए हैं, जिनसे इस फ्रॉड को पहचाना जा सकता है:
- ईमेल एड्रेस के स्पेलिंग या डोमेन नेम में मामूली बदलाव होना।
- दफ्तर का समय समाप्त होने के बाद देर रात या असामान्य समय पर अचानक संदेश आना।
- बिना किसी पूर्व सूचना के अत्यधिक अर्जेंट या गोपनीय वित्तीय ट्रांसफर करने का दबाव।
- किसी अनजान या नए बैंक खाते में तुरंत धनराशि भेजने का निर्देश मिलना।
- सामने वाले व्यक्ति द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर बात करने से बार-बार बचना।
- मैसेज या ईमेल की भाषा और व्याकरण में अजीब गलतियां होना।
कंपनियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षा निर्देश
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल देखकर किसी भी अनजान खाते में भुगतान न किया जाए। जब भी वरिष्ठ अधिकारियों के नाम से ऐसा कोई संदेश मिले, तो तुरंत उनके व्यक्तिगत या आधिकारिक फोन नंबर पर सीधे कॉल करके पुष्टि करें। कंपनियों को अपने सिस्टम में सुरक्षा के कड़े नियम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
बड़े भुगतान या असामान्य वित्तीय लेन-देन के लिए मल्टीलेवल अप्रूवल सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा, काम खत्म होने के बाद व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइसेज को तुरंत लॉगआउट कर देना चाहिए और व्हाट्सएप में टू-फैक्टर वेरिफिकेशन हमेशा एक्टिव रखना चाहिए।
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत यहां करें शिकायत
यदि कोई व्यक्ति या कर्मचारी इस प्रकार की ठगी का शिकार हो जाता है, तो समय गंवाए बिना तुरंत कार्रवाई करने की सलाह दी गई है। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा, राजस्थान पुलिस साइबर हेल्पडेस्क के नंबरों 9256001930 और 9257510100 पर सूचना दी जा सकती है या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
