राजस्थान में लंबे समय से अटके नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक) आयोग ने बुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद अब राज्य सरकार ओबीसी आरक्षण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
रिपोर्ट सौंपे जाने के दौरान मुख्यमंत्री आवास पर आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी और सदस्य राजीव सक्सेना, मोहन मोरवाल, गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया मौजूद रहे। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर, झाबर सिंह खर्रा और जोगाराम पटेल भी उपस्थित थे।
60 अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए प्रस्तावित
आयोग की सिफारिशों के मुताबिक, प्रदेश के कुल 309 नगरीय निकायों में से 60 अध्यक्ष पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित किए जाने का प्रस्ताव है। इसी अनुपात को आधार मानकर पंचायती राज संस्थाओं में भी ओबीसी आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।
रिपोर्ट मिलने के बाद अब स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग इसमें शामिल आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इसके आधार पर विभिन्न पदों और सीटों के आरक्षण की अंतिम सूची तैयार की जाएगी।
इस बार कंप्यूटर से होगी आरक्षण की प्रक्रिया
आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में इस बार बड़ा बदलाव किया गया है। पुरानी परंपरा के उलट इस बार पर्ची निकालकर लॉटरी निकालने के बजाय पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित प्रणाली से पूरी की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर माना जा रहा है कि इस तकनीकी बदलाव से पारदर्शिता बढ़ेगी और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
14 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य
सरकार की ओर से पूर्व में हाईकोर्ट में प्रस्तुत रोडमैप के अनुसार, ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया 14 अगस्त तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करेगा।
प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत 17 अगस्त के आसपास नगरीय निकाय चुनावों की घोषणा और उसके बाद पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। हालांकि, चुनाव की वास्तविक और अंतिम तिथियां राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी। राजस्थान हाईकोर्ट ने भी सरकार और निर्वाचन आयोग को निर्धारित समयसीमा में चुनाव कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।
