राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव पर मंडराया संकट!
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर समय बितता जा रहा है लेकिन चुनावी प्रक्रिया अभी भी शुरुआती चरण में अटकी हुई नजर आ रही है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, जबकि इस डेडलाइन में अब केवल 42 दिन बाकि हैं। चुनाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में परिसीमन और मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने का कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन इसके बाद की कई अहम प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं। सबसे बड़ा मुद्दा आरक्षित सीटों के निर्धारण का है, जो राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच लंबित है। आयोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण संबंधी विवरण मांग चुका है और हाल ही में सरकार को रिमाइंडर भी भेजा गया है, लेकिन अब तक सीटों का अंतिम निर्धारण नहीं हो सका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन, जांच, नाम वापसी, मतदान और मतगणना जैसी पूरी प्रक्रिया में कम से कम 40 से 45 दिन का समय लगता है। वहीं पंचायत और निकाय चुनाव एक ही दिन कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं माना जा रहा, क्योंकि दोनों चुनावों की प्रक्रिया अलग-अलग होती है और इनके लिए अलग समय की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि आज से भी पूरी चुनावी प्रक्रिया शुरू की जाए, तब भी हाईकोर्ट की तय समयसीमा के भीतर दोनों चुनावों को संपन्न कराना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
आपको बता दे प्रदेश में पंचायतों और निकायों का कार्यकाल पूरा हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन चुनाव नहीं होने के कारण ग्रामीण और शहरी स्वशासन की व्यवस्थाएं पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सकी है। इससे स्थानीय विकास कार्यों और जनप्रतिनिधित्व पर भी असर पड़ रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की समयसीमा तय की थी, लेकिन राज्य सरकार के आग्रह पर इसे बढ़ाकर 31 जुलाई कर किया था.. अब नई डेडलाइन भी तेजी से नजदीक आ रही है और चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना जारी होने का इंतजार बना हुआ है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार हाईकोर्ट के आदेश की पालना कर पाते हैं या फिर एक बार फिर समयसीमा को लेकर कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा

