सावन का पवित्र महीना इस साल 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। इस पूरे महीने में शिव भक्त भगवान शिव की आराधना और व्रतों में लीन रहते हैं। सावन का चौथा और आखिरी सोमवार का व्रत 24 अगस्त को रखा जाएगा। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह आखिरी सोमवार बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ और शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं।
सावन के चौथे सोमवार का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 24 अगस्त को पड़ने वाले सावन के आखिरी सोमवार पर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। साधक अपनी सुविधा के अनुसार इन मुहूर्तों में शिव पूजा कर सकते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 बजे से 05:11 बजे तक
- अमृत चौघड़िया: सुबह 05:55 बजे से 07:32 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: सुबह 09:09 बजे से 10:46 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 बजे से 12:47 बजे तक
दुर्लभ योग और ज्योतिषीय संयोग
सावन के इस आखिरी सोमवार पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति से कई शक्तिशाली योग बन रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन प्रीति योग सुबह 07:04 बजे तक रहेगा, जिसके स्वामी बुध और देवता भगवान विष्णु हैं। इसके बाद आयुष्मान योग शुरू हो जाएगा जो पूरे दिन प्रभावी रहेगा। इस योग को उत्तम स्वास्थ्य और सकारात्मकता देने वाला माना जाता है।
इसके अलावा, देवगुरु बृहस्पति के कर्क राशि में उच्च रहने से हंस राजयोग का निर्माण हुआ है। वहीं, सिंह राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग भी बन रहा है। इन संयोगों के कारण इस सोमवार का धार्मिक महत्व काफी बढ़ गया है।
पूजा की विधि और जरूरी नियम
सावन के आखिरी सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत या पूजन का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद भगवान शिव को बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं।
पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करना फलदायी माना गया है। अंत में शिवजी को सात्विक भोग लगाएं और संध्या के समय कपूर व घी से आरती करें। इस विशेष दिन पर गरीबों या जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है।
