निवाड़ी जिले में इस बार सांची के पेड़े चर्चा का विषय बने हुए हैं।मामला इसलिए भी खास है,क्योंकि राष्ट्रीय पर्वो जैसे स्वतंत्रता दिवस,गणतंत्र दिवस व अन्य राष्ट्रीय पर्व के मौके पर शासकीय और अन्य संस्थानों में मिष्ठान वितरण को लेकर सागर संभाग के कमिश्नर ने बाकायदा लिखित आदेश जारी किया था।लेकिन आरोप है कि कमिश्नर के आदेश के बावजूद जिले में अधिकांश जगहों पर सांची के पेड़े वितरित नहीं किए गए।अब इसको लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं, तो वहीं पृथ्वीपुर से कांग्रेस विधायक नीतेंद्र सिंह राठौर ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले में इन दिनों साँची के पेड़ों की खूब चर्चा हो रही हैं दरअसल सागर संभाग के कमिश्नर ने सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, नगर पालिका सीएमओ और जिला शिक्षा अधिकारियों सहित शासकीय, अर्द्धशासकीय और शैक्षणिक संस्थानों के लिए निर्देश जारी किए थे।आदेश में कहा गया था कि 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर स्थानीय बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय मध्यप्रदेश शासन के सहकारी उपक्रम बुंदेलखंड सहकारी दुग्ध संघ, सागर द्वारा निर्मित सांची के पेड़े वितरित किए जाएं।इसके पीछे तर्क दिया गया था कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर कई बार शिकायतें सामने आती हैं और फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं की आशंका रहती है।लेकिन निवाड़ी जिले में इस आदेश के पालन को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि 15 अगस्त को जिले में अधिकांश स्थानों पर सांची के पेड़े वितरित ही नहीं किए गए। किसको लेकर कॉंग्रेस विधायक ने भी सवाल खड़े किये है उनका कहना है किजब जिले में कमिश्नर के आदेश का ही पालन नहीं हो रहा है, तो फिर किसके आदेश का पालन होगा? मेरी जानकारी के अनुसार जिले में कहीं भी 15 अगस्त को सांची के पेड़े नहीं बांटे गए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और अब मजाक का विषय बनता जा रहा है।विधायक के आरोपों के बाद मामला और गरमा गया है। सोशल मीडिया पर भी लोग कमिश्नर के आदेश के पालन को लेकर सवाल उठा रहे हैं।वहीं, जब इस पूरे मामले पर निवाड़ी कलेक्टर जमुना भिड़े से कैमरे पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने इस मामले में कैमरे पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।फिलहाल सवाल यही है कि जब संभाग स्तर से बाकायदा लिखित आदेश जारी हुआ था, तो निवाड़ी जिले में उसका पालन क्यों नहीं हुआ?क्या संबंधित अधिकारियों ने आदेश को गंभीरता से नहीं लिया, या फिर इसके पीछे कोई और वजह है?अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या जवाब देता है।
निवाड़ी में नहीं बंटे सांची के पेड़े, कमिश्नर के आदेश पर उठे सवाल
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