देशभर में आज़ादी का अमृत वर्ष और स्वतंत्रता पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर उन्हें नमन किया जा रहा है। लेकिन बुरहानपुर में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो हर देशवासी को आहत कर सकती है। यहां निशुल्क पाठ्य पुस्तक भंडार के जर्जर भवन में महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद सहित अन्य महापुरुषों के चित्र कबाड़ के बीच धूल खाते मिले। जिम्मेदारी किसकी है, इस सवाल पर अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए। हालांकि मामला सामने आने के बाद जिला परियोजना अधिकारी ने जांच कर कार्रवाई की बात कही है। यह तस्वीरें बुरहानपुर के उस भवन की हैं जहां निशुल्क पाठ्य पुस्तक भंडार का संचालन किया जा रहा है। एक ओर पूरा देश स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य महापुरुषों के चित्र कबाड़ के ढेर में धूल खाते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य न केवल लापरवाही को उजागर करता है बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान पर भी सवाल खड़े करता है,और शर्मनाक घटना नजर आ रही है।जब इस मामले में संकुल प्राचार्य शैलेन्द्र हजारी से चर्चा की गई तो उन्होंने साफ कहा कि यह भवन करीब पांच वर्ष पहले ही विद्यालय द्वारा छोड़ दिया गया था।भवन जर्जर होने के कारण विभाग को इसकी जानकारी दी जा चुकी थी और अब इस परिसर में विद्यालय का कोई संचालन नहीं होता। उनके अनुसार वर्तमान में यहां पुस्तकों का संग्रहण और वितरण बीआरसी एवं डीसी कार्यालय द्वारा किया जा रहा है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी विद्यालय की नहीं है।वहीं निशुल्क पाठ्य पुस्तक भंडार के प्रभारी बीआरसी उदय सिंह से दूरभाष पर चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल पुस्तकों के रखरखाव की है। महापुरुषों के चित्र कबाड़ में कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है और उन्होंने इसकी जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की बताई।मामला जिला परियोजना अधिकारी तक पहुंचा तो उन्होंने इसे बेहद गंभीर और शर्मनाक बताया। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।देश जिन महापुरुषों के बलिदान को याद कर आज़ादी का उत्सव मना रहा है, उनके चित्र यदि सरकारी परिसर में कबाड़ के बीच पड़े मिलें तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि हमारी संवेदनाओं पर भी प्रश्नचिह्न है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या यह मामला भी केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाता है।
आजादी के अमृत पर्व के बीच शर्मनाक तस्वीर
मध्य प्रदेश
