यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर एक बार फिर बड़ा हमला किया है। ईरान समर्थित इन विद्रोहियों ने दक्षिणी सऊदी अरब के कई शहरों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिसमें 13 आम नागरिक घायल हो गए।
सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि सोमवार, 14 सितंबर 2026 को खमीस मुशेत, आभा और ताइफ शहरों में आम नागरिकों के ठिकानों पर ये हमले किए गए। इन हमलों में सात घरों और दो गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा है। घायलों को मामूली से लेकर मध्यम स्तर की चोटें आईं हैं, जिनका इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है।
लाल सागर के द्वीपों पर कब्जा और तेल पाइपलाइन बंद
हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर (रेड सी) में रणनीतिक रूप से अहम ग्रेटर और लेसर हनिश द्वीपों पर भी कब्जा जमा लिया है। इस कदम से समुद्री शिपिंग के एक अहम रास्ते पर इनका नियंत्रण और मजबूत हो गया है। यमन में सरकारी बलों और इन विद्रोहियों के बीच चल रही झड़पों में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और हजारों विस्थापित हुए हैं।
इस बीच, सऊदी अरब की एक अहम तेल पाइपलाइन की मरम्मत का काम चल रहा है, जिस पर पिछले हफ्ते हमला हुआ था। दो क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, इस पाइपलाइन को पूरी तरह ठीक होने में तीन से पांच हफ्ते लग सकते हैं, जिससे यह ज्यादातर समय बंद रहेगी। इस व्यवधान के चलते दुनिया के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्टर की वैश्विक बाजार तक आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है।
वैश्विक तेल बाजार पर असर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट
पेट्रोलियम सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईरान के साथ जारी तनाव की वजह से सऊदी अरब को अपना एक्सपोर्ट पर्शियन गल्फ से हटाकर दूसरी तरफ मोड़ना पड़ा है, क्योंकि ईरानी हमलों ने गल्फ से बाहर निकलने के एकमात्र रास्ते, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की शिपिंग को बाधित कर दिया है।
सऊदी अरब अपने कच्चे तेल के प्रोडक्शन को गल्फ के बंदरगाहों से रेड सी पर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाने के लिए 1,200 किलोमीटर (745 मील) लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर निर्भर है। लेकिन पिछले हफ्ते हुए हमले के बाद से यह पाइपलाइन बंद है। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोन्स को जिम्मेदार ठहराया है।
