TCS Nashik Case: उत्पीड़न की शिकायत पर 'मामला दबाने' की आरोपी मैनेजर अश्विनी चैनानी को Nashik Court से जमानत
नाशिक की एक अदालत ने टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़े बहुचर्चित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले में आरोपी मैनेजर अश्विनी चैनानी को मंगलवार को जमानत दे दी। चैनानी पर नाशिक यूनिट में सहकर्मी द्वारा उत्पीड़न की शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई न करने और मामले को दबाने का आरोप है।
अदालत ने इसी मामले में सह-आरोपी दानिश शेख को भी जमानत दे दी है। इससे पहले इस मामले में आरोपी बनाई गईं निदा खान और तौसीफ अख्तर को भी अदालत से राहत मिल चुकी है।
क्या था मामला और FIR के आरोप?
नाशिक में दर्ज नौ FIRs में अश्विनी चैनानी का नाम complainants के बतोर बयानों में सामने आया था। औपचारिक तौर पर उन्हें उस FIR में आरोपी बनाया गया था जिसमें आरोप है कि सहकर्मी द्वारा उत्पीड़न की शिकायत लेकर जब पीड़िता उनके पास पहुंची, तो उन्होंने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
शिकायत के मुताबिक, जब पीड़िता ने बार-बार यह मुद्दा उठाया, तो चैनानी ने उसे "मामला वहीं रफा-दफा करने" यानी 'ड्रॉप इट' करने को कहा था।
वकीलों की दलीलें और शर्तें
बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि चैनानी की पोस्टिंग पुणे में थी और उनका नाशिक यूनिट पर कोई सीधा प्रशासनिक नियंत्रण नहीं था। वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी का कथित घटनाओं से कोई सीधा संबंध नहीं था और पीड़िता की ओर से उन्हें कोई लिखित शिकायत नहीं सौंपी गई थी।
अदालत ने अश्विनी चैनानी को 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है। साथ ही शर्त रखी गई है कि वह गवाहों को धमकाएंगी नहीं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगी। इस मामले में विस्तृत अदालत आदेश की प्रतीक्षा है।
