शिक्षक दिवस... यानी वह दिन, जब देश अपने शिक्षकों को सम्मान देता है। लेकिन बुरहानपुर में आज यही शिक्षक अपने सम्मान से ज्यादा परिवार का घर चलाने की चिंता में हैं।
अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षक पिछले चार महीने से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। महंगाई लगातार बढ़ रही है, बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के राशन तक का खर्च बढ़ चुका है, लेकिन शिक्षकों की आमदनी चार महीने से थमी हुई है। इतना ही नहीं, शिक्षक आज भी छठे वेतनमान में अटके हैं, जबकि सातवें वेतनमान का मामला हाईकोर्ट में लंबित है। शिक्षक दिवस पर देखिए सिस्टम के इस दर्द की कहानी...
शिक्षक वेतन के लिए शासन की तरफ देख रहा
जिस हाथ में बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है, आज वही हाथ अपने हक के वेतन के लिए शासन की ओर देख रहा है।बुरहानपुर में अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों के शिक्षकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शिक्षक रोज स्कूल पहुंच रहे हैं, बच्चों को पढ़ा रहे हैं, अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं... लेकिन बदले में मिलने वाला वेतन पिछले चार महीने से अटका हुआ है।शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ महंगाई लगातार बढ़ रही है... आटा करीब 70 रुपए किलो तक पहुंच गया है, खाद्य तेल 200 रुपए लीटर के आसपास है... वहीं दूसरी तरफ चार महीने से घर में वेतन नहीं आया।
वेतन और भत्तों का नहीं मिल रहा लाभ
राशन का खर्च हो या बच्चों की फीस... बिजली का बिल हो या घर का किराया... हर जिम्मेदारी अपनी जगह खड़ी है। ऊपर से त्योहारों का समय सामने है। ऐसे में सवाल है कि जिस शिक्षक के भरोसे बच्चों का भविष्य है, उसके अपने परिवार का वर्तमान आखिर किस भरोसे चलेगा?शिक्षक नरेंद्र जाधव सहित शिक्षकों का कहना है कि वे आज भी छठे वेतनमान में ही अटके हुए हैं। सातवें वेतनमान से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में लंबित है। शिक्षकों का दावा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद उन्हें समय पर वेतन और भत्तों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अब शिक्षकों के घर चूल्हे जलने की चिंता
शिक्षक दिवस पर मंचों से शिक्षकों के सम्मान की बातें हो रही हैं... लेकिन बुरहानपुर के इन शिक्षकों के घर में आज सवाल सम्मान का नहीं, चूल्हा जलाने का है।मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ का कहना है कि अनुदान की व्यवस्था के तहत फरवरी 2026 तक राशि मिलती रही, लेकिन इसके बाद पिछले चार माह से अनुदान अटक गया है। नतीजा यह हुआ कि शिक्षकों का वेतन भी रुक गया।मामले को लेकर संघ की बुरहानपुर इकाई ने जिला शिक्षा अधिकारी रोहिणी पवार को आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित अनुदान और वेतन का तत्काल भुगतान करने की मांग की है।
शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि वे सरकार से कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मांग रहे... वे सिर्फ अपना बकाया वेतन मांग रहे हैं।अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो शिक्षक 11 सितंबर 2026 को भोपाल में आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय कार्यालय का घेराव और प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।वहीं जिला शिक्षा अधिकारी रोहिणी पवार का कहना है कि बजट आते ही स्कूलों को राशि का आवंटन किया जाएगा।
लेकिन शिक्षक दिवस पर सबसे बड़ा सवाल यही हैजिस शिक्षक ने जिंदगी भर दूसरों के बच्चों को पढ़ाकर उनका भविष्य बनाने का काम किया... क्या सरकार उसके अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के लिए चार महीने का वेतन भी समय पर नहीं दे सकती?आज शिक्षक दिवस है... फूलों से सम्मान का दिन है... लेकिन बुरहानपुर के शिक्षकों के घर में फूलों की जगह चार महीने से बकाया वेतन की चिंता है
