हुमा कुरैशी की नई फिल्म ‘बेबी डू डाई डू’ चर्चा में
हिंदी सिनेमा में अपराध, रहस्य और रोमांच पर आधारित अनेक फिल्में बनी हैं, लेकिन किसी मूक-बधिर महिला को एक पेशेवर हत्यारी के रूप में केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्में बेहद कम देखने को मिलती हैं। यही कारण है कि अभिनेत्री हुमा कुरैशी की आगामी फिल्म ‘बेबी डू डाई डू’ अपनी घोषणा के साथ ही दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। फिल्म के टीज़र और फर्स्ट लुक ने इस उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने फिल्म बेबी डू डाई डू से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इस फिल्म से उनका जुड़ाव केवल एक अभिनेत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक निर्माता के रूप में भी रहा है। हुमा के अनुसार, “एक निर्माता के तौर पर मैं हमेशा यह सोचती थी कि क्या यह फिल्म कुछ नया कह रही है और एक अभिनेत्री के तौर पर मैं यह देखती थी कि क्या बेबी की कहानी सच और विश्वसनीय लगती है। सौभाग्य से दोनों सवालों का जवाब एक ही था। मैं नहीं चाहती थी कि हम केवल किसी पारंपरिक कहानी को महिला पात्र के माध्यम से दोहरा दें। वहीं एक अभिनेत्री के रूप में मैं बेबी को किसी प्रतीक या विचार के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत इंसान के रूप में प्रस्तुत करना चाहती थी। शूटिंग के दौरान मेरे भीतर की निर्माता और अभिनेत्री लगातार संवाद करती रहीं। यदि दोनों में से कोई एक भी संतुष्ट नहीं होती थी, तो हम दृश्य को दोबारा शूट करने से भी नहीं हिचकते थे।”
हुमा ने कहा कि बेबी डू डाई डू का सबसे बड़ा आकर्षण उसका केंद्रीय किरदार है। उनके अनुसार, यह ऐसा चरित्र है जिसे भारतीय दर्शकों ने पहले कभी पर्दे पर नहीं देखा। बेबी करमारकर एक देसी हिटवुमन है जो निडर है, अपनी कमजोरियों और खामियों के साथ मौजूद है, पूरी तरह अप्रत्याशित है और जिसे नजरअंदाज करना संभव नहीं। उन्होंने बताया कि फिल्म का परिवेश मुंबई की कठोर और निर्मम दुनिया में रचा गया है, जहां हर पल खतरा मौजूद है, रिश्तों और वफादारियों का कोई स्थायित्व नहीं है और जीवन की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती।
उन्होंने कहा कि फिल्म केवल एक क्राइम थ्रिलर नहीं है, बल्कि इसमें एक्शन, सस्पेंस और डार्क ह्यूमर का ऐसा मिश्रण है जो दर्शकों को लगातार बांधे रखेगा। उनके अनुसार, बेबी का चरित्र जितना खतरनाक है, उतना ही मानवीय भी है और यही विरोधाभास उसे विशेष बनाता है। यही कारण है कि इस भूमिका को निभाना उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण और रोमांचक अनुभव रहा।
हुमा ने यह भी बताया कि निर्देशक नचिकेत सामंत ने फिल्म की दुनिया को बेहद बारीकी से गढ़ा है। वहीं उनके भाई और अभिनेता-निर्माता साकिब सलीम के साथ इस परियोजना पर काम करना उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा। सलीम सिब्लिंग्स और पुणे 04 के सहयोग से निर्मित यह फिल्म 3 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी। फिल्म में सिकंदर खेर, चंकी पांडे, रचित सिंह, मरुधा शेखावत, विद्या मालवदे, अरुण कुशवाह और हिमांशु मलिक भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे।हुमा के शब्दों में, “बेबी केवल एक हत्यारी नहीं है, वह एक ऐसा किरदार है जो अपनी शर्तों पर जीता है। उसकी दुनिया खतरों से भरी है, लेकिन वह किसी भी परिस्थिति से डरकर पीछे हटने वाली नहीं है। मुझे विश्वास है कि दर्शक उसकी इस अनोखी यात्रा से जुड़ाव महसूस करेंगे।”फिल्म की नायिका ‘बेबी करमारकर’ एक ऐसी महिला है जो सुन और बोल नहीं सकती, लेकिन उसकी यह शारीरिक स्थिति उसकी शक्ति को सीमित नहीं करती। इसके विपरीत, वह एक बेहद खतरनाक, कुशल और रहस्यमयी कॉन्ट्रैक्ट किलर है। मुंबई में लगातार हो रही रहस्यमयी हत्याओं के पीछे उसी का हाथ है, लेकिन पुलिस और मीडिया उसकी पहचान तक पहुँचने में असफल दिखाई देते हैं। यह चरित्र पारंपरिक फिल्मी नायिकाओं की छवि से बिल्कुल अलग है और इसी कारण दर्शकों के लिए अत्यंत आकर्षक बन जाता है।फिल्म की सबसे रोचक विशेषता उसका प्रतीकात्मक हथियार है। बेबी अपने साथ हमेशा एक लाल रंग का छाता रखती है। पहली नजर में यह एक साधारण छाता प्रतीत होता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने पर पता चलता है कि उसके भीतर एक बंदूक छिपी हुई है। यही छाता उसकी पहचान भी है और उसका सबसे घातक हथियार भी। लाल छाते का यह रूपक फिल्म के रहस्य और शैली को एक अलग आयाम प्रदान करता है।इस दौरान वर्ल्ड ट्रेड पार्क में फ़िल्म बेबी डू डाई डू के एक विशाल कटआउट का अनावरण अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने किया। इस मौक़े पर बड़ी संख्या में मीडिया और फ़िल्म फ़ेंस मौजूद रहे।

