न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में एक लेख क्या छपा, वाशिंगटन से लेकर दिल्ली तक उसकी चर्चा हो रही है...उस लेख में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली के बारे में बताया गया है...लेख का शीर्षक है, दुनिया भर में डील कर रहे हैं, मोदी ट्रंप के खिलाफ बचाव कर रहे हैं...खास कर ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप की कार्यशैली से इंडो अमेरिकन रिश्तों में आए ठंडेपन और उपजे हालात के बाद मोदी की ग्लोबल स्तर पर सक्रियता का जिक्र किया गया है...हर समस्या दुखदायी होती है...वह समय हाथ पर हाथ धरने या फिर सिर पकड़कर बैठने का नहीं होता है...धैर्य और संयम से आपदा में अवसर ढूंढकर उससे बाहर निकलना योग्यता और अनुभव को दर्शाता है...प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल का अब तक का समय, पहले दो कार्यकाल के मुकाबले अधिक चुनौतीपूर्ण है...हालांकि दूसरे कार्यकाल के दौरान भी मुसीबतों ने पीछा नहीं छोड़ा था, फिर भी वे उनका मुकाबला करते हुए आगे निकल गए...इस बार भी उन्हें आंतरिक के साथ, बाहर से भी चुनौतियों से दो चार होना पड़ रहा है...खासकर अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से पूरी दुनिया हैरान और परेशान है...ट्रेड वॉर, छोटे और कमजोर देशों को धकियाने और विदेशी नेताओं से मुलाकात के दौरान उनके अजीबोगरीब कार्य व्यवहार ने सभी को चौंकाया...सचेत किया...इजरायल के साथ मिलकर ईरान के साथ युद्ध और उपजे हालातों से सभी देश प्रत्यक्ष और परोक्ष रुप से अभी तक प्रभावित हो रहे हैं...ऐसे विषम हालात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी विदेश यात्राओं के जरिये आपदाओं को अवसर में बदलते हुए भारत को और अधिक मजबूत किया...न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में छपे एक लेख ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि, भारत विषमताओं के हर दौर से आसानी से पूरी रफ्तार के साथ निकल कर विकास के नए पायदान छूने का सामर्थ्य रखता है...यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हर विदेश यात्रा का एक मकसद होता है...और हर बैठक का विशेष लक्ष्य होता है...उन्होंने इन यात्राओं के जरिये उनको हासिल किया...ब्रिटेन के साथ इतिहास का सबसे बड़ा एफटीए, यूरोपियन यूनियन के साथ एफटीए, फ्रांस के साथ एआई और डिफेंस पार्टनर और अब स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप, नॉर्वे के साथ समझौता, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड के साथ हुए समझौते का टारगेट फिक्स था और उसे पूरा किया... रिपोर्ट के अनुसार मोदी ने दो दर्जन देशों से एफटीए करके ट्रंप के टेरिफ वॉर के प्रभाव को शून्य कर दिया। मोदी ने फ्रांस,जर्मनी,जापान, दक्षिण कोरिया को डिफेंस पार्टनर बनाकर भारत के रक्षा और सुरक्षा कवच को मजबूत कर लिया। मोदी ने एससीओ और ब्रिक्स को साथ लेकर वैश्विक स्तर पर भारत को और अधिक मजबूत कर दिया...रूस से तेल खरीदने के मामले में अमेरिका के तमाम दबावों के बावजूद अपनी ऊर्जा जरुरतों को पूरा करने के लिए मोदी ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा...इतना ही नहीं, यूएई,अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से नया विकल्प भी तैयार किया। तेजी से बदल रहे जिओ पॉलिटिक्स में भारत की भूमिका की मजबूती, और ऑपरेशन सिंदूर के बाद डोनाल्ड ट्रंप के बदलते रवैये से चौकन्ना मोदी ने घरेलू और वैश्विक स्तर पर खेली जा रही शतरंज की हर चाल को नाकाम करते हुए भारत को आर्थिक रुप से मजबूत बनाए रखने के जो प्रयास किए, न्यूयॉर्क टाइम्स ने उसकी ताकीद की है...खास बात यह है कि जब मोदी किर्गिस्तान के बिश्केक शहर में एससीओ बैठक में शिरकत कर रहे हैं, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अप्रैल से जून की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी दर 7.8 फीसदी होना, प्रतिकूल स्थितियों से उबरने का संकेत है...डोनाल्ड ट्रंप के भारत की अर्थव्यवस्था को डेड इकोनॉमी बताने वाले बयान की गूंज ने हालांकि घरेलू राजनीति में बवाल मचा दिया था, उसका तफ्सरा किया जाए या फिर न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट पर चर्चा...भारत ने हर चुनौती को अवसर में बदल कर यह साबित कर दिया... और यह सब मुमकिन हो पाया प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की वजह से, घरेलू राजनीति में जिनके विदेशी दौरे हर बार भले ही बहस के विषय रहे हों, लेकिन उनके दौरों ने भारत के लिए आर्थिक और रक्षा के मामले में ऐसा सुरक्षा कवच बना दिया है, जो किसी ओर से कभी भी भेदा न जा सकेगा...
