भारतीय घरों में तुलसी का पौधा सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसे सुख-समृद्धि और सकारात्मकता से भी जोड़ा जाता है। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के जानकारों के मुताबिक, घर में तुलसी लगाने और उसकी देखरेख को लेकर कुछ नियम तय किए गए हैं। इन नियमों का पालन करने से घर में बरकत बनी रहती है, जबकि अनदेखी करने से विपरीत असर हो सकता है।
किस दिन लगाना है शुभ और कब बचें
वास्तु शास्त्र के अनुसार, गुरुवार और शुक्रवार का दिन तुलसी का नया पौधा लगाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, जबकि शुक्रवार माता लक्ष्मी का दिन है। इन दोनों दिनों में पौधा लगाने से घर में आर्थिक संपन्नता आती है। इसके अलावा कार्तिक महीने में तुलसी लगाना और तुलसी विवाह करना भी बहुत शुभ फलदायी माना गया है।
दूसरी तरफ, कुछ खास तिथियों और वारों पर नया पौधा लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। रविवार, सोमवार और एकादशी तिथि को तुलसी का पौधा जमीन या गमले में नहीं लगाना चाहिए। साथ ही, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, श्राद्ध पक्ष और होलिका दहन के दिन भी नया पौधा खरीदने या लगाने से परहेज करना चाहिए।
पौधे की सही दिशा और स्थान
घर में तुलसी का पौधा रखने के लिए उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को सबसे सही दिशा माना गया है। इन दिशाओं में पौधा रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। जिन घरों में आंगन की सुविधा है, वहां इसे बीच में या ईशान कोण में रखा जा सकता है। वहीं, अपार्टमेंट या फ्लैट में रहने वाले लोग इसे बालकनी में ऐसी जगह रख सकते हैं जहां इसे पर्याप्त धूप और ताजी हवा मिल सके।
पत्तियां तोड़ने के नियम
तुलसी की पत्तियां तोड़ने के लिए भी धार्मिक और वास्तु के कुछ नियम तय हैं। एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, सूर्य संक्रांति और रात के समय तुलसी के पत्ते तोड़ने की मनाही है। इसके अलावा मध्य रात्रि और परिवार में अशौच के समय भी पौधे को छूने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर दिन के समय ही और पौधे को नुकसान पहुंचाए बिना पत्तियां तोड़ने की परंपरा है।
