झुंझुनूं नगर परिषद सभापति चुनाव: कांग्रेस से अब्दुल्ला अगवान और बीजेपी से मनु धनखड़ ने भरे नामांकन
झुंझुनूं नगर परिषद के सभापति पद के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सभापति पद के लिए कांग्रेस और भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं। भाजपा की ओर से वार्ड नंबर 49 के पार्षद मनु धनखड़ ने नामांकन दाखिल किया है, जबकि कांग्रेस ने अब्दुल्ला अगवान को मैदान में उतारा है। दोनों दलों के प्रत्याशियों के पर्चा भरने के साथ ही नगर परिषद में बोर्ड बनाने के लिए जोड़-तोड़ और रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला अगवान ने सभापति पद के लिए दो नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। पहले नामांकन में पूर्व चेयरमैन तैयब अली प्रस्तावक बने, जबकि दूसरे नामांकन पत्र में निर्दलीय पार्षद वीरेंद्र डारा ने प्रस्तावक की भूमिका निभाई। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, निर्दलीय पार्षद का कांग्रेस प्रत्याशी के साथ आना पार्टी के लिए बड़ा सियासी संकेत माना जा रहा है। क्या हैं सियासी समीकरण और संख्याबल? 60 वार्डों वाली झुंझुनूं नगर परिषद में मौजूदा राजनीतिक गणित कांग्रेस के पक्ष में झुकता दिखाई दे रहा है। बोर्ड गठन और बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 31 पार्षदों का है। नगर परिषद में कांग्रेस के पास अपने 30 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के 15 पार्षद हैं। इसके अलावा 15 पार्षद निर्दलीय चुनकर आए हैं। कांग्रेस को बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए सिर्फ एक और समर्थन की जरूरत थी। निर्दलीय पार्षद वीरेंद्र डारा का समर्थन मिलने के बाद कांग्रेस खेमे का दावा मजबूत हो गया है। हालांकि, संख्याबल कम होने के बावजूद भाजपा भी अंदरखाने जोड़-तोड़ और रणनीति बनाने में जुटी है, जिससे चुनाव मुकाबला दिलचस्प हो गया है। 21 सितंबर को होगा फैसला दोनों दलों की ओर से नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें 21 सितंबर को होने वाले सभापति चुनाव पर टिक गई हैं। मतदान के दिन पार्षदों की क्रॉस वोटिंग या अंतिम समय की स्थिति ही झुंझुनूं नगर परिषद की तस्वीर पूरी तरह साफ करेगी।