राजस्थान स्थित श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे कृषि प्रधान जिलों में अब नरमा-कपास के अलावा  मूंग की फसल भी किसानों के लिए कमाई का बड़ा साधन बनती जा रही  है.... कम समय के अंदर तैयार की जाने वाली, कम लागत और कम पानी में अच्छा उत्पादन देने वाली मूंग की खेती की ओर किसान अपना  रुझान तेजी से बढ़ा रहे है। और इसी को लेकर कृषि विभाग ने प्रदेशभर में मूंग उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ी योजना शुरू की , जिसके चलते राजस्थान के करीब 1 लाख 75 हजार किसानों को फ्री में बीज का  मिनी किट दिया जायेगा। जबकि अकेले श्रीगंगानगर जिले के अंदर  16 हजार किसानों को इसका लाभ दिया जायेगा।  राजस्थान राज्य बीज निगम की ओर से प्रमाणित और अधिसूचित किस्मों के बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं और प्रत्येक किसान को 4 किलो बीज वाला मिनी किट वितरित किया जाएगा। बता दे जिले के लिए कुल 640 क्विंटल बीज आवंटित हुआ है जिसको लेकर कृषि विभाग का कहना  है कि यह योजना सिर्फ मूंग उत्पादन बढ़ाने तक ही  सीमित नहीं रह गया है..  बल्कि इससे फसल विविधीकरण को भी मजबूती मिलेगी  जिससे किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहेंगे , वही किसानों का  चयन करने के लिए विशेष कमेटियां भी बनाई गई हैं और बीज वितरण प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाये रखने के लिए  भौतिक तरह से सत्यापन भी कराया जाएगा। इसके अलावा अधिकारियों के द्वारा भी गांव-गांव जाकर 'विशेष मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि सही किसानों तक लाभ पहुंचाया जा सके...  कृषि अनुसंधान अधिकारियों का मानना है की मूंग की खेती करने में पानी से लेकर खाद और कीटनाशकों की आवश्यकता अन्य फसलों की तुलना में काफी हद तक कम होती है, जिसके चलते  छोटे और सीमांत वर्ग के  किसानों की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ जाता  है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक  किसानों को “विराट” नाम से प्रसिद्ध उन्नत किस्म MH-1142 अपनाने की सलाह दी गयी  है, क्योंकि यह पीला मोजेक वायरस रोग के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता रखती है और बेहतर उत्पादन देने में मदद करती है। केंद्र सरकार द्वारा खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के लिए मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,768 रुपए प्रति क्विंटल तय करने के बाद वही  किसानों में भी  इस फसल को लेकर खासा उत्साह देखा गया है। बेहतर MSP, बाजार में लगातार बढ़ती मांग और कम लागत के चलते किसान मूंग को “हरी कमाई” वाली फसल मान रहे हैं। वही कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में इसी तरीके से आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों को मिलता रहा तो राजस्थान मूंग उत्पादन के क्षेत्र में देश का बड़ा हब बनकर साबित होगा।