वैसे तो नागौर सांसद और आरएलपी के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल हमेशा अपने कोई ना कोई बयान को लेकर सुर्खियों में रहते है.. लेकिन अबकी बार उन्होंने कुछ ऐसा किया है जिससे प्रशासन को भी आधी रात को उनके सामने झुकना पड़ा.... बेनीवाल की जयपुर कूच एक बार फिर राजस्थान की सियासत में बड़ा घटनाक्रम बन गयी, जब भैराणा धाम की जमीन को लेकर चल रहा साधु-संतों और ग्रामीणों का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। औद्योगिक विकास और RIICO परियोजना के विरोध में लंबे समय से धरना दे रहे संतों के समर्थन में बेनीवाल हजारों समर्थकों के साथ जयपुर की ओर कुच किया जिससे प्रशासन और पुलिस महकमे में देर रात हड़कंप मच गया जैसे-जैसे काफिला आगे बढ़ा, जयपुर ग्रामीण और आसपास के इलाकों में तनाव की स्थिति बन गई, जिसके बाद IG, जिला कलेक्टर और RIICO के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाईवे पर ही आपातकालीन बैठक कर के बातचीत का रास्ता अपनाया।
हाईवे पर बने अस्थायी प्रशासनिक कैंप में देर रात तक चली मैराथन बातचीत में आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर गंभीर रूप से चर्चा हुई। संतों और ग्रामीणों का आरोप था कि भैराणा धाम क्षेत्र सदियों से गौचर भूमि, धार्मिक गतिविधियों और प्राकृतिक जल स्रोतों का केंद्र रही है, ऐसे में यहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना आस्था और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा है। वहीं प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।
लंबी बातचीत के दौरान आखिरकार सरकार और प्रशासन की ओर से बड़ा फैसला लेकर निर्णायक मोड पर आये जिसके तहत भैराणा धाम क्षेत्र की लगभग 800 बीघा भूमि पर RIICO द्वारा प्रस्तावित औद्योगिक विकास कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोका गया। इसके साथ ही डेयरी विकास के लिए आवंटित दो बड़े व्यावसायिक प्लॉट्स के आवंटन पर भी फिलहाल रोक लगाने पर सहमति बनी। पूरे विवाद की तकनीकी, कानूनी और पर्यावरणीय जांच के लिए एक उच्च स्तरीय संयुक्त समिति के गठन का भी निर्णय लिया गया है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी, RIICO प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और क्षेत्र के संतों को शामिल किया जाएगा। यह समिति आने वाले दिनों में मौके पर जाकर भूमि का भौतिक निरीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
वार्ता समाप्त होने के बाद में बेनीवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह सिर्फ एक जमीन का मामला नहीं, बल्कि जनभावनाओं, आस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुडी लड़ाई है। उन्होंने इसे किसानों, युवाओं और संत समाज की जीत बताते हुए कहा कि प्रशासन ने उनकी ज्यादातर मांगों को स्वीकार कर लिया है और अब आगे की प्रक्रिया समिति की रिपोर्ट के आधार पर तय होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि जांच में प्राकृतिक जल स्रोत, नाले और कैचमेंट एरिया प्रभावित पाए जाते हैं तो इस परियोजना को पूरी तरह रद्द कराने की दिशा में कानूनी तरीके से कार्रवाई की जाएगी।
वही इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जयपुर हाईवे पर भारी पुलिस बल मुस्तैद रहा और हालात पर लगातार नजर रखी गई। देर रात हुए इस समझौते के बाद काफिला शांतिपूर्वक तरीके से वापस लौटा, लेकिन एक बात तय है राजस्थान की राजनीति में इस ‘आधी रात कूच’ ने एक बार फिर कड़ा सियासी संदेश दिया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा गर्माने की संभावना है
