राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में भारतीय जनता पार्टी के भीतर गुटीय संघर्ष खुलकर सामने आ गया है। निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और सांसद सीपी जोशी के खेमों के बीच चल रही सियासी तकरार अब मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर सतह पर आ गई है। छह मंडल अध्यक्षों की हालिया नियुक्ति से पार्टी के एक बड़े वर्ग में असंतोष व्याप्त है, जिसे लेकर संगठन में जबरदस्त नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, इन छह में से पांच मंडल अध्यक्ष विधायक चंद्रभान सिंह आक्या गुट से जुड़े माने जा रहे हैं। इसे लेकर सांसद सीपी जोशी के समर्थकों में भारी रोष है। नाराज कार्यकर्ताओं और नेताओं ने नियुक्तियों के विरोध में गुप्त बैठक की, जिसमें प्रमुख पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रणनीति के लीक होने से बचने के लिए सभी प्रतिभागियों के मोबाइल फोन एक थैले में रखवा दिए गए थे।बैठक में नियुक्त मंडल अध्यक्षों को लेकर कड़ा विरोध जताया गया और आरोप लगाए गए कि संगठनात्मक नियुक्तियों में नियमों और तय मापदंडों की अनदेखी की गई है..
असंतुष्ट खेमे का कहना है कि 45 वर्ष की आयु सीमा समेत कई मानकों को दरकिनार कर एकतरफा निर्णय लिए गए, जिससे संगठनात्मक संतुलन बिगड़ा है।गौरतलब है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में चंद्रभान सिंह आक्या का भाजपा से टिकट कट गया था। इसके बाद आक्या ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई थी। चुनाव परिणामों के बाद आक्या ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया। इसके बाद से ही वे भाजपा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे जिले की सियासत लगातार गरमाई हुई है।नियुक्तियों के विरोध में धनेत सरपंच रणजीत सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से भी मुलाकात की।
प्रदेश अध्यक्ष ने मामले के समाधान का आश्वासन दिया है, हालांकि असंतुष्ट खेमे ने 29 जनवरी तक का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि फैसला नहीं बदला गया तो आंदोलन सड़क पर उतर सकता है।जानकारी के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कार्यकर्ताओं को नियुक्ति प्रक्रिया की जानकारी दी और बताया कि क्षेत्रीय विधायक, सांसद और जिलाध्यक्ष से नाम मांगे गए थे। उनकी सहमति के बाद ही मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। बताया जा रहा है कि सांसद सीपी जोशी की ओर से इस प्रक्रिया में कोई नाम प्रस्तावित नहीं किया गया, जिसका लाभ आक्या गुट को मिला।इस पूरे मामले पर भाजपा जिलाध्यक्ष रतन लाल गाडरी ने पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ असंतुष्ट लोगों ने प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात जरूर की है, लेकिन जो नियुक्तियां हुई हैं, वही अंतिम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश नेतृत्व जो भी निर्देश देगा, उसकी पूरी पालना की जाएगी।फिलहाल भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की है। यदि नियुक्तियों का फैसला नहीं बदला गया तो कार्यकर्ताओं के सड़क पर उतरने की आशंका है, वहीं नियुक्त पदाधिकारियों को हटाने की स्थिति में जैन समाज सहित अन्य वर्गों की नाराजगी पार्टी को भारी पड़ सकती है। चित्तौड़गढ़ में यह सियासी खींचतान आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।
