छिंदवाड़ा: गांव की महिलाओं ने ऐसी जादुई गेंद तैयार की है, जो बंजर जमीन पर गिरेगी तो जमीन हरी भरी होकर हसीन वादियों में बदल जाएगी. लगातार घट रहे जंगल और वीरान होती धरती को बचाने के लिए छिंदवाड़ा के छोटे से गांव पांजरा की कुछ महिलाओं ने ऐसा काम शुरू किया है, जिससे पैसों की कमाई के साथ-साथ धरती भी हरी भरी हो सकती है. दो महिलाओं से शुरू हुए उनके कारवां से लगातार महिलाएं भी जुड़ रही हैं और धरती को सुंदर बनाने के साथ-साथ पर्यावरण बचाने के लिए घरों के काम से कुछ समय बचा कर ऐसी गेंद तैयार कर रही हैं, जिन्हें जमीन पर फेंकने के बाद नुकसान नहीं बल्कि पौधे उगेंगे.खेत की मिट्टी, चूल्हे से निकली राख और गोबर की खाद मिलाकर आटे की तरह गूथ लिया जाता है. फिर छोटे-छोटे लड्डू बनाकर उनके भीतर बीज भर दिए जाते हैं. कुछ देर सूखने के बाद ये सीड बॉल के रूप में तैयार हो जाते हैं. दरअसल, ये जमीन की सुंदरता और मेकअप करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं. लड्डू बनाने वाली शांता बघेल ने बताया कि "हमें इनको बनाने के लिए सिर्फ मेहनत की जरूरत होती है, खर्च नहीं लगता, क्योंकि जिन वस्तुओं का हम उपयोग कर रहे हैं, वह आसानी से घरों में मिल जाती है. इन्हें लगाने के बाद हम धरती को हरा भरा बना सकेंगे. जिससे हमें अच्छी हवा और सुंदर पर्यावरण मिल सकेगा.4 महीने से सीड बॉल बनाने का काम कर रही मीरा बघेल ने बताया कि "महिलाएं दिनभर घरों के काम करती हैं. उसमें से कुछ समय निकालकर हमने सोचा कि क्यों ना कुछ ऐसा किया जाए, जिससे कुछ आमदनी भी हो और हम समाज सेवा में भी योगदान दे सकें. कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि वे पर्यावरण को सुंदर बनाने के लिए सीड बॉल बना सकते हैं, फिर क्या था हमारे घरों के आसपास और खेतों में जो पेड़ लगे होते हैं, उनके बीज काफी मात्रा में मिल जाते हैं.इन्हीं आसपास के बीजों को हम इन लड्डुओं में डालते हैं, ताकि यह आसानी से जलवायु के अनुसार हमारी धरती में पनप सके. हम इन्हें लोगों को बाजार में बेचने के लिए भी तैयार कर रहे हैं. अगर कोई खरीदना चाहे तो वह अपने खेतों या बंजर जमीन में लगा सकता है.करीब 4 महीने की मेहनत के बाद महिलाओं ने 50000 सीड बॉल तैयार किया है. इनमें इमली, अपराजिता, अमलतास, बबूल खेतों में लगे होते हैं, लेकिन हजारों की संख्या में उनके बीज जमीन पर गिरते हैं. पौधे कम बन पाते हैं, सीड बॉल के जरिए पौधे जल्द बन जाते हैं. खासतौर पर खेतों के आसपास फेंसिंग तैयार करने के लिए सीड बॉल काफी कारगर साबित होते हैं.वनस्पति शास्त्र विशेषज्ञ डॉक्टर विकास शर्मा ने बताया कि सीड बॉल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें कहीं भी फेंककर पौधे उगाए जा सकते हैं. यहां तक कि बंजर, दुर्गम या पहाड़ी इलाकों में भी, जहां जाना मुश्किल होता है. मिट्टी और गोबर की परत बीज को चूहों, पक्षियों, कीड़ों और धूप से बचाती है. यह बीज को अंकुरित होने तक सुरक्षित रखती है. मिट्टी की परत बीज के आसपास नमी बनाए रखती है, जिससे कम पानी में भी बीज के अंकुरित होने की संभावना बढ़ जाती है.सीड बॉल का उपयोग करने के लिए खेत की जुताई या खुदाई करने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य बना रहता है. इन सीड बॉलों का उपयोग मरुस्थलों या कटे हुए जंगलों को हरियाली में बदलने के लिए बहुत कारगर है. सीड बॉल्स से उगाए गए पेड़ भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर पर्यावरण को शुद्ध करने में मदद करते हैं. यह पेड़ उगाने का एक सस्ता तरीका है, जिसमें ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती है.जमीन को हरा-भरा कर सुंदर बनाने का प्रयास कर रही महिलाओं ने बताया कि बारिश के पहले ही जमीन में हम इन बीज की गेंदे यानी सीड बॉल को डाल देंगे. जब पहली बारिश होगी तो मिट्टी की गीली होने के बाद यह बीज अंकुरित होकर पौधे बन जाएंगे और फिर जमीन हरी भरी होगी, क्योंकि सीधे बीज डालने से गर्मी में खराब भी होते हैं और कई कीड़े मकोड़े एवं बीजों को खा लेते हैं.इसके साथ ही अगर हम पौधों की नर्सरी तैयार करते हैं और उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट करते हैं, तो उनकी जड़े मजबूत होने में समय लगता है. कई पेड़ पनप नहीं पाते हैं, लेकिन जो बीज जगह पर ही अपनी जड़े बनता है. उसके मजबूत होने के साथ-साथ वह ज्यादा सक्सेस होता है
