Monday, 2 November 2026
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अमेरिका ने सऊदी अरब को दी F-35 जेट बेचने की मंजूरी: ₹2.3 लाख करोड़ की डील; चीन की जासूसी पर अमेरिकी एजेंसियों की चिंता

संक्षेप में

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 2.3 लाख करोड़ रुपए की कीमत वाले 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि चीन इस सौदे के जरिए F-35 की संवेदनशील तकनीक हासिल कर सकता है, जिस पर अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी से पहले मंथन जारी है।

मुख्य बातें

  • अमेरिका ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दी है।
  • इस रक्षा सौदे की कुल कीमत 24 अरब डॉलर यानी करीब 2.3 लाख करोड़ रुपए है।
  • पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने चीन द्वारा तकनीक हासिल किए जाने की आशंका जताई है।
  • डील पूरी होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है।
देश विदेश
अमेरिका ने सऊदी अरब को दी F-35 जेट बेचने की मंजूरी: ₹2.3 लाख करोड़ की डील; चीन की जासूसी पर अमेरिकी एजेंसियों की चिंता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। इस रक्षा सौदे की कुल कीमत करीब 24 अरब डॉलर यानी लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। हालांकि, इस बड़ी डिफेंस डील के जमीन पर उतरने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी मिलना अनिवार्य है।

इस बीच पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने तकनीकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।

संवेदनशील तकनीक और चीन का खतरा

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इस बात का डर सता रहा है कि F-35 की अत्यंत संवेदनशील तकनीक चीन के हाथ लग सकती है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि सऊदी अरब में मौजूद चीनी नेटवर्क या बीजिंग के साथ रियाद के सैन्य सहयोग के जरिए इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान के सीक्रेट्स लीक हो सकते हैं।

F-35 को अमेरिका का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है, जिसमें अत्याधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी सिस्टम लगे हैं। यदि इन प्रणालियों से जुड़ी जानकारी बीजिंग तक पहुंचती है, तो अमेरिकी सैन्य सुरक्षा को बड़ा नुकसान हो सकता है।

इसी खतरे को भांपते हुए खुफिया रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि F-35 के संचालन और रख-रखाव वाले ठिकानों पर केवल अमेरिकी और सऊदी अधिकारियों के साथ अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए।

चीन के साथ सऊदी के बढ़ते सैन्य संबंध

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रियाद और बीजिंग के बीच पहले से ही गहरे सैन्य और तकनीकी रिश्ते हैं। सऊदी अरब चीन से बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदता रहा है और अमेरिकी आकलन के अनुसार, चीनी विशेषज्ञ सऊदी को इन मिसाइलों के निर्माण और उनके इस्तेमाल को बेहतर बनाने में तकनीकी सहायता भी दे रहे हैं।

इसके अलावा, सऊदी अरब के दूरसंचार और अन्य अहम बुनियादी ढांचे में हुआवे (Huawei) और जेडटीई (ZTE) जैसी चीनी कंपनियों के उपकरणों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने पहले भी इन टेलीकॉम उपकरणों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।

UAE डील का पुराना अनुभव और इजराइल का रुख

खाड़ी देशों को F-35 विमानों की बिक्री को लेकर अमेरिका के सामने यह चुनौती नई नहीं है। साल 2020 में भी ट्रम्प प्रशासन ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को F-35 बेचने पर सहमति जताई थी, लेकिन उस दौरान भी यूएई और चीन के बढ़ते सैन्य संबंधों के चलते वह बिक्री प्रक्रिया रोक दी गई थी।

दूसरी ओर, इस डिफेंस डील पर इजराइल ने भी आपत्ति जताई है। वर्तमान में इजराइल मध्य पूर्व का इकलौता देश है जिसके बेड़े में F-35 फाइटर जेट शामिल हैं। अमेरिका की पारंपरिक विदेश नीति यह सुनिश्चित करने की रही है कि मध्य पूर्व में इजराइल की सैन्य बढ़त और सामरिक बढ़त बनी रहे, इसलिए इस सौदे के दौरान इजरायली हितों पर पड़ने वाले असर का भी बारीकी से मूल्यांकन किया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सऊदी अरब और अमेरिका के बीच F-35 डील कितने की है?

अमेरिका ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दी है, जिनकी कुल कीमत करीब 24 अरब डॉलर यानी लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपए है।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को F-35 डील को लेकर क्या चिंता है?

पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) को चिंता है कि सऊदी अरब और चीन के बीच गहरे सैन्य और तकनीकी संबंधों के कारण F-35 की संवेदनशील तकनीक और रडार सिस्टम की जानकारी चीन के हाथ लग सकती है।

क्या सऊदी अरब को F-35 मिलने से पहले किसी की मंजूरी जरूरी है?

हाँ, इस डील के फाइनल होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की मंजूरी मिलना अनिवार्य है।

क्या इससे पहले भी किसी खाड़ी देश को F-35 बेचने पर रोक लगी थी?

हाँ, 2020 में ट्रम्प प्रशासन ने UAE को F-35 बेचने पर सहमति दी थी, लेकिन चीन के साथ यूएई के बढ़ते संबंधों की चिंताओं के कारण बाद में वह बिक्री प्रक्रिया रोक दी गई थी।