बड़वानी
जिले के भीलखेड़ा ब्लॉक की कुकरा राजघाट पंचायत के ग्रामीण पानी की दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ गांव में 4 महीने से पेयजल संकट बना हुआ है, तो दूसरी तरफ 2-3 साल पहले स्वीकृत कुआं आज भी अधूरा पड़ा है। परेशान ग्रामीणों ने 23 जून को कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में दो शिकायतें देकर तत्काल समाधान की मांग की।ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी शुरू होते ही कुकरा राजघाट में पानी की समस्या गंभीर हो जाती है। कुएं का पानी पीने लायक नहीं बचा है और मोटर सिर्फ 15-20 मिनट चलने पर कुआं सूख जाता है। पानी के लिए रोजाना विवाद हो रहे हैं।  ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत और प्रशासन को कई बार आवेदन देने के बावजूद शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूरी में ग्रामीणों को 4 महीने से टैंकर से पानी डलवाना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कुएं का पानी सिर्फ नहाने-धोने के लिए मिल पाता है, वह भी नाकाफी है।दूसरी शिकायत में ग्रामीणों ने कहा कि 2-3 साल पहले ग्राम कुकरा में पंचायत के माध्यम से कुएं की स्वीकृति मिली थी। काम शुरू भी हुआ, लेकिन आधा काम कराकर छोड़ दिया गया। उसके बाद से आज तक पंचायत द्वारा कोई काम नहीं कराया गया।  कुएं का काम अधूरा रहने से पानी की समस्या और गहरा गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कुआं पूरा हो जाता तो गांव को कुछ राहत मिल सकती थी।  दोनों शिकायतों में ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यलय में जनसुनवाई में मांग की है कि पेयजल संकट का तत्काल निराकरण किया जाए और अधूरे पड़े कुएं का काम पूरा कराया जाए, ताकि गांव को पानी मिल सके।  अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।