Tuesday, 27 October 2026
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राजस्थान के मंदिरों में दीपोत्सव के लिए अटका बजट: अशोक गहलोत बोले- 50 दीये और 2 लीटर तेल का भी संकट; सरकार पर साधा निशाना

संक्षेप में

राजस्थान के देवस्थान विभाग के करीब 460 मंदिरों में दीपोत्सव के लिए मिलने वाला 1.25 लाख रुपये तक का बजट समय पर जारी नहीं हुआ है। अगले सप्ताह छह दिवसीय पर्व शुरू होने से पहले राशि न मिलने पर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है।

मुख्य बातें

  • प्रदेशभर के देवस्थान विभाग के करीब 460 मंदिरों में दीपोत्सव का बजट अटका है।
  • जयपुर के राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के 32 मंदिर इसमें शामिल हैं।
  • दीपावली आयोजन के लिए मंदिरों को करीब 1.25 लाख रुपये मिलते हैं।
  • अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
राज्य समाचार
राजस्थान के मंदिरों में दीपोत्सव के लिए अटका बजट: अशोक गहलोत बोले- 50 दीये और 2 लीटर तेल का भी संकट; सरकार पर साधा निशाना

प्रदेशभर के करीब 460 मंदिरों में दीपोत्सव की तैयारियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दीपावली के आयोजन के लिए मिलने वाली राशि अब तक जारी नहीं होने से पुजारियों और व्यवस्थापकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अगले सप्ताह से छह दिवसीय दीपोत्सव पर्व की शुरुआत होनी है, लेकिन देवस्थान विभाग के अधीन आने वाले इन मंदिरों में अभी तक बजट नहीं पहुंचा है।

इस देरी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

गहलोत का तंज- धर्म की बात, पर मंदिरों में तेल का संकट

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर 33 लाख दीये जलाकर रिकॉर्ड बनाने का दावा करने वाली पार्टी के राज में मंदिरों में दीपदान के लिए मामूली बजट भी अटका हुआ है।

अशोक गहलोत ने कहा- "धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार के शासन में प्रदेशभर के करीब 460 मंदिरों में दीपोत्सव का बजट रुका हुआ है। पांच दिन के इस पर्व के लिए मात्र दो लीटर तेल और 50 दीपक तक की व्यवस्था है।"

देवस्थान विभाग के नियमों के मुताबिक, इन मंदिरों में दीपावली के आयोजन के लिए करीब 1.25 लाख रुपये तक के बजट का प्रावधान है। हर साल यह राशि पर्व से करीब एक महीना पहले जारी कर दी जाती है। पिछले साल भी यह बजट तय समय से करीब 25 दिन पहले मिल गया था, जिससे व्यवस्थाएं समय पर पूरी हो जाती थीं। लेकिन इस बार एक हफ्ता शेष रहने के बावजूद राशि जारी न होने से भगवान के विशेष श्रृंगार, भोग, फूल बंगला, दीपदान, रंगोली और अन्नकूट जैसे आयोजनों पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

जयपुर के 32 समेत 460 मंदिरों पर असर

देवस्थान विभाग के प्रत्यक्ष प्रभार के तहत अकेले जयपुर में 32 मंदिर आते हैं, जबकि पूरे राजस्थान में ऐसे मंदिरों की संख्या लगभग 460 है। इन सभी जगहों पर पारंपरिक अनुष्ठानों और सजावट का जिम्मा पुजारियों और प्रबंधन समितियों पर होता है।

कम समय और बिना वित्तीय मदद के इन आयोजनों को संभालना स्थानीय प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारों का कहना है कि यदि अगले एक-दो दिन में बजट जारी नहीं हुआ, तो अन्नकूट और विशेष दीपदान की परंपराओं को सीमित दायरे में ही पूरा करना पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान के कितने मंदिरों में दीपोत्सव का बजट अटका है?

देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रदेशभर के करीब 460 मंदिरों में दीपोत्सव का बजट अटका हुआ है, जिसमें जयपुर के 32 मंदिर भी शामिल हैं।

देवस्थान विभाग के मंदिरों को दीपावली आयोजन के लिए कितना बजट मिलता है?

राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के इन मंदिरों में दीपावली और दीपोत्सव के आयोजनों के लिए करीब 1.25 लाख रुपये के बजट का प्रावधान है।

अशोक गहलोत ने सरकार पर क्या आरोप लगाया है?

अशोक गहलोत ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि जो पार्टी बड़े आयोजनों में रिकॉर्ड बनाने के दावे करती है, उसके राज में मंदिरों में दीपदान के लिए दो लीटर तेल और 50 दीपकों तक का बजट भी समय पर जारी नहीं हो रहा है।

मंदिरों में दीपोत्सव की तैयारियां क्यों प्रभावित हो रही हैं?

दीपावली से एक महीना पहले मिलने वाली राशि इस बार अब तक जारी नहीं हुई है, जबकि अगले सप्ताह से छह दिवसीय दीपोत्सव पर्व शुरू होने वाला है।