अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के आर्थिक संबंधों और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरफ से लगाए जाने वाले टैरिफ का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था या द्विपक्षीय रिश्तों को कमजोर करना नहीं है। रुबियो ने भारत के साथ साझेदारी को अमेरिकी विदेश नीति का एक अहम स्तंभ करार दिया।
इंटरव्यू के दौरान रुबियो ने स्वीकार किया कि रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध और टैरिफ नीति जैसे कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक मोर्चे पर दबाव बढ़ा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इस तरह के फैसलों के दूरगामी प्रभावों को लेकर वाशिंगटन सजग है।
रूस से तेल खरीद और कूटनीतिक संतुलन
रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिकी प्रशासन लगातार दबाव की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत कई बार टैरिफ जैसे आर्थिक उपाय अमल में लाए जाते हैं, जिसका असर अन्य प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों पर भी पड़ना स्वाभाविक है।
रुबियो के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति इन दो अलग-अलग उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद में हैं, जो कि एक जटिल काम है। जब उनसे यह पूछा गया कि रूस से तेल आयात के चलते भविष्य में नए प्रतिबंध लगने से द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर होगा, तो उन्होंने माना कि इस संवेदनशीलता को बहुत सावधानी से संभालने की आवश्यकता है।
ट्रंप के फैसले और रणनीतिक साझेदारी
अमेरिकी प्रशासन के भीतर भारत को लेकर क्या रुख रहा है, इसका जिक्र करते हुए रुबियो ने एक वाकया साझा किया। जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित कानून के तहत अनिवार्य टैरिफ लागू करने के बजाय भारत को विशेष छूट दी, तो उन्हें घरेलू राजनीतिक हलकों और मीडिया में आलोचना का सामना करना पड़ा था।
इसके बावजूद, ट्रंप प्रशासन ने कोई कठोर कदम उठाने से परहेज किया। इसका मुख्य कारण यह था कि अमेरिका भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को किसी भी तरह के बड़े नुकसान से बचाना चाहता था।
जामनगर रिफाइनरी और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनिंग के मोर्चे पर रुबियो ने भारत की क्षमताओं की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि दुनिया में गिने-चुने देश ही ऐसे हैं जो वेनेजुएला से आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करने की तकनीकी क्षमता रखते हैं, और इस मामले में भारत वैश्विक स्तर पर अहम भूमिका निभाता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी के अपने दौरे का हवाला देते हुए उन्होंने इसे ऊर्जा विविधता (एनर्जी डाइवर्सिफिकेशन) के लक्ष्यों को साधने का एक बेहतरीन माध्यम बताया। रुबियो ने जोर देकर कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों की निर्भरता से बाहर निकालने की जरूरत है।
