राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही और सुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त मिले अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वृहद शास्ति प्रकरणों के तहत कुल 30 मामलों का निस्तारण करते हुए 17 सेवारत अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने और 16 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में कटौती या स्थायी रोक लगाने की मंजूरी दी है। यह पूरी कार्रवाई जयपुर में रविवार (27 अक्टूबर) को आधिकारिक रूप से सामने आई।
बजरी माफिया और तस्करों से सांठगांठ पर सख्ती
राज्य सेवा के अधिकारियों के खिलाफ मामलों की गंभीरता के आधार पर संचयी प्रभाव से 2 से 4 वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने का दंड अनुमोदित किया गया है। इनमें अवैध बजरी खनन से जुड़े माफिया से अनुचित लाभ लेने और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से सांठगांठ के एक मामले में तत्कालीन वृत्ताधिकारी की 4 वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकी गई हैं।
इसके अलावा, मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले अपराधियों से मिलीभगत रखने, उनके करीब रहने और इनामी बदमाशों की गिरफ्तारी न करने के आरोप में तत्कालीन वृत्ताधिकारी तथा एक कॉन्स्टेबल की 2-2 वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकी गई हैं। वहीं, पुलिस अनुसंधान में गंभीर लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन पुलिस निरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक और कॉन्स्टेबल समेत 3 कर्मियों पर भी यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितताएं
राजकीय संसाधनों के दुरुपयोग और ड्यूटी से नदारद रहने वाले अफसरों पर भी गाज गिरी है। मनरेगा के निरीक्षण और संधारण में कोताही बरतने वाले राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के एक अधिकारी की वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकी गई हैं। इसके अलावा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय तक बिना सूचना अनुपस्थित रहने के 3 मामलों और गलत ब्लड इश्यू करने की गंभीर घटना में एक डॉक्टर की 2 वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकी गई हैं। श्रम, उद्यान और सचिवालय सेवा के दोषी पाए गए अन्य अफसरों पर भी नियमानुसार कार्रवाई हुई है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों पर पेंशन रोकने का शिकंजा
भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में रिटायर्ड अफसरों को भी नहीं बख्शा गया है। राजस्थान लेखा सेवा के एक सेवानिवृत्त अधिकारी पर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में फेरबदल करने और राज्य को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का दोष साबित हुआ है। इस गंभीर मामले में उनकी देय पेंशन का शत-प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से रोक दिया गया है।
इसी तरह, आरएएस के 2 रिटायर्ड अफसरों पर आवासीय और कमर्शियल भूखंडों को कृषि भूमि बताकर अवैध भू-रूपांतरण करने और सरकार को वित्तीय चपत लगाने का आरोप प्रमाणित हुआ है। इसके चलते उनकी 20 प्रतिशत पेंशन राशि 5 साल के लिए रोकी गई है। पंचायत समिति स्तर पर बिना काम के फर्जी भुगतान कर राजकोष को नुकसान पहुंचाने वाले एक विकास अधिकारी और सहायक अभियंता पर भी कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही, चिकित्सा, सामाजिक न्याय, खनिज, कॉलेज शिक्षा और देवस्थान विभागों से जुड़े वित्तीय मामलों में भी रिटायर्ड कर्मियों के खिलाफ दंड तय किया गया है।
8 मामलों में मिली दोषमुक्ति
सरकार ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत आए 8 मामलों में जांच के बाद आरोप साबित न होने पर संबंधित अधिकारियों को दोषमुक्त करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है।
