बीकानेर नगर निगम में मेयर पद के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी ने वार्ड 73 से पार्षद अनिल कल्ला को अपना मेयर उम्मीदवार घोषित किया है, जिससे नाराज होकर वार्ड 50 के पार्षद नवरतन डागा ने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया है। डागा सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर रहे हैं।

पार्टी के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने 28 पार्षदों की लिखित सहमति के बाद अनिल कल्ला के नाम पर मुहर लगाई थी, लेकिन टिकट बंटवारे से असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है।

टिकट बंटवारे पर सवाल और बगावत

नवरतन डागा खुद भी मेयर पद के प्रबल दावेदारों में शामिल थे। अनिल कल्ला का नाम फाइनल होने के बाद डागा ने बगावत का बिगुल फूंक दिया और पार्टी नेतृत्व के सामने सवाल खड़े किए।

डागा ने खुलकर सवाल उठाया कि एक ही परिवार यानी कल्ला परिवार को ही बार-बार पार्टी टिकट क्यों दिया जाता है। इस नाराजगी के चलते उन्होंने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरने का निर्णय लिया है।

विवादों से रहा है पुराना नाता

नवरतन डागा के वार्ड 50 में चुनाव के दौरान टिकट वितरण को लेकर भारी हंगामा हुआ था। इसी वार्ड में पार्षद के टिकट को लेकर शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई थी, जिसने स्थानीय राजनीति में पहले ही हलचल मचा दी थी।

मुकाबला हुआ दिलचस्प

कांग्रेस के भीतर इस बगावत ने मेयर चुनाव के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस ने 28 पार्षदों के समर्थन का दावा करते हुए अनिल कल्ला को मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने वार्ड 13 से पार्षद सुरेंद्र सिंह शेखावत पर दांव खेला है।

नवरतन डागा के निर्दलीय उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय या बागी समीकरणों में उलझता दिख रहा है। 80 वार्डों वाले बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत (42 सीटें) है, लेकिन पार्टी के भीतर का यह घमासान मतदान के दिन समीकरण बिगाड़ सकता है। फिलहाल दोनों दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने की जुगत में लगे हैं।