दतिया से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां आज भी इंसानों को गुलाम बनाकर रखा जा रहा था। मामला है ग्राम लक्ष्मणपुरा का, जहाँ कलेक्टर के सख्त निर्देश के बाद राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने अचानक दबिश दी तो वहां का नजारा देख अफसर भी सन्न रह गए।यहाँ 4 मानसिक रूप से कमजोर मजदूरों को बंधक बनाकर उनसे जानवरों की तरह काम कराया जा रहा था। न पैसा, न मजदूरी, बस दिन-रात गुलामी। प्रशासन ने चारों को चंगुल से आजाद करा लिया है।सबसे बड़ा सवाल - आखिर इन बेबसों का गुनाह क्या था? दिमागी कमजोर होना?समाजसेवी मनोज दीक्षित ने तो और भी सनसनीखेज दावा किया है। उनका कहना है कि लक्ष्मणपुरा में अभी भी 10 से 15 बंधुआ मजदूर गुपचुप जगहों पर कैद हैं, जिनकी तलाश में प्रशासन जंगल-जंगल खाक छान रहा है।चारों मजदूरों को सुरक्षित मुक्त करा लिया गया है, मेडिकल कराया गया है। परिजनों की तलाश की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।प्रथम दृष्टया ये 100% बंधुआ मजदूरी का मामला है। बयान दर्ज हो रहे हैं, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत ऐसी कार्रवाई करेंगे कि दोबारा कोई ऐसी हिम्मत न करे।एडिशनल एसपी मनजीत सिंह चावला ने भी कैमरे पर पुष्टि की है कि इस अमानवीय खेल में शामिल एक भी आरोपी बख्शा नहीं जाएगा।अब देखना होगा कि इस गुलामी के धंधे के पीछे आखिर कौन सा सफेदपोश मास्टरमाइंड है?
दतिया के लक्ष्मणपुरा में 10 साल से चल रहा था गुलामी का खेल
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