चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब न्यायपालिका से जुड़े दिग्गजों ने मोर्चा संभाल लिया है। देश के 42 पूर्व जजों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के समर्थन में एक खुला खत जारी किया है। इस पत्र में संवैधानिक संस्थाओं पर साक्ष्यों के बिना लगाए जा रहे आरोपों को लेकर गहरी चिंता जताई गई है।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस पंकज मित्तल समेत 42 नामचीन पूर्व जजों और न्यायविदों ने इस खत पर हस्ताक्षर किए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले पक्षों को अपनी शिकायतें सिर्फ राजनीतिक मंचों या प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय स्थापित कानूनी और लोकतांत्रिक रास्तों से उठानी चाहिए।
वोट चोरी के आरोपों पर उठाए सवाल
हस्ताक्षर करने वाले पूर्व जजों ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर धांधली के आरोप सबूतों के बिना उछाले जा रहे हैं। जब चुनाव आयोग ऐसे मामलों में हलफनामा दाखिल करने को कहता है, तो कोई पक्ष सामने नहीं आता।
खत में आगे कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर भी दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। हार मिलने पर मशीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है, जबकि उन्हीं मशीनों से जीत मिलने पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता। जिन दलों ने दशकों तक देश की सत्ता संभाली है, आज वे उसी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं जिसके बूते वे खुद सत्ता में आए थे।
पूर्व जजों के तीन बड़े दावे
पत्र में चुनाव प्रक्रिया को लेकर तीन अहम चिंताएं सामने रखी गई हैं:
- चुनावों को अवैध करार देने के प्रयास देश में अशांति बढ़ा सकते हैं और इससे अराजक तत्वों को बल मिल सकता है।
- चुनाव संचालन में जुटे अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से अपशब्द कहे जा रहे हैं और सत्ता परिवर्तन के बाद परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं।
- कुछ एक्टिविस्ट संगठन इन बेबुनियाद आरोपों को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश में हैं, जिसके तहत अदालत में एक के बाद एक याचिकाएं तो दाखिल की जाती हैं, लेकिन सबूत के नाम पर दस्तावेज पेश नहीं किए जाते।
SIR और वोटर लिस्ट को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
इससे पहले सितंबर के महीने में 2,000 से अधिक नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को एक खुला खत लिखकर SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी। उस पत्र में वोटर लिस्ट के प्रबंधन और ECINet प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली में गड़बड़ियों का हवाला देते हुए स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की गई थी।
उस अभियान में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, पूर्व आईएएस अदिति मेहता, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी और अभिनेता प्रकाश राज समेत विभिन्न क्षेत्रों के जाने-माने चेहरे शामिल थे।
जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां का एक बयान भी सुर्खियों में है। उन्होंने 4 अक्टूबर को NALSAR यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि किसी भी ऐसी प्रक्रिया को उचित नहीं ठहराया जा सकता जो लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करती हो। ऐसी प्रक्रियाएं मूल रूप से मनमानी होती हैं।
